कृति सेनन ने कपड़ों को लेकर आलोचना पर दिया जवाब, बोलीं- संस्कृति दिल में होती है, नेकलाइन में नहीं

मुंबई। रक्षाबंधन के मौके पर ज्वेलरी ब्रांड GIVA के लिए किए गए अपने नए कैंपेन को लेकर अभिनेत्री कृति सेनन सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। कैंपेन में उनके फेस्टिव लुक को लेकर कुछ यूजर्स ने सवाल उठाए और इसे पारंपरिक त्योहार के अनुरूप नहीं बताया। आलोचनाओं के बीच कृति ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी महिला के पहनावे के आधार पर उसके संस्कार, संस्कृति या परंपराओं के प्रति सम्मान को तय नहीं किया जाना चाहिए।

25 अगस्त को शेयर किए गए अपने पोस्ट में कृति ने रक्षाबंधन के महत्व पर बात करते हुए कहा कि किसी त्योहार की भावना केवल इस बात से निर्धारित नहीं होती कि कोई व्यक्ति उस दिन क्या पहन रहा है। उनके मुताबिक, त्योहारों की असली अहमियत उन भावनाओं, रिश्तों और परंपराओं में होती है, जिन्हें लोग अपने दिल से निभाते हैं।

कैंपेन के लुक को लेकर हुई थी चर्चा

GIVA के रक्षाबंधन कैंपेन में कृति सेनन ऑफ-व्हाइट ब्रालेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट वाले फेस्टिव अंदाज में दिखाई दी थीं। तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके पहनावे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे भारतीय पारंपरिक त्योहार के हिसाब से उपयुक्त नहीं माना, जबकि कई लोगों ने अभिनेत्री के पहनावे का समर्थन भी किया।

कृति ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि रक्षाबंधन उनके लिए भाई-बहन के बीच सुरक्षा, प्यार और रिश्ते के मजबूत बंधन का त्योहार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी महिला के कपड़ों को उसके संस्कार या अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान का पैमाना बनाना सही नहीं है।

बहन नुपुर के साथ भी मनाती हैं रक्षाबंधन

कृति ने अपनी बहन नुपुर सेनन के साथ रक्षाबंधन मनाने की परंपरा का जिक्र करते हुए बताया कि दोनों बहनें एक-दूसरे को राखी बांधती हैं। उनका मानना है कि बहनें भी एक-दूसरे की सुरक्षा और साथ के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती हैं। दोनों एक-दूसरे की अच्छी सेहत, खुशी और लंबी उम्र की कामना करती हैं।

कुत्तों को भी बताया परिवार का हिस्सा

अपने कैंपेन में कुत्तों को शामिल करने के सवाल पर भी कृति ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनके लिए सुरक्षा, प्यार और देखभाल की भावना केवल इंसानी रिश्तों तक सीमित नहीं है। उनके कुत्ते भी परिवार का हिस्सा हैं और इसलिए उनके लिए भी यही भावनाएं मायने रखती हैं।

महिलाओं के पहनावे पर समाज की सोच पर सवाल

कृति ने अपने बयान में महिलाओं के कपड़ों को लेकर समाज की सोच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लगातार यह बताने की कोशिश की जाती है कि उन्हें क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं। उनके मुताबिक, समय के साथ एथनिक फैशन और पहनावे में बदलाव आया है, लेकिन महिलाओं के कपड़ों को आज भी उनकी संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति बनी हुई है।

कृति ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी महिला की संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान उसके कपड़ों की नेकलाइन से नहीं, बल्कि उसके दिल और विचारों से जुड़ा होता है। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर पहनावे, परंपरा और व्यक्तिगत पसंद को लेकर बहस शुरू हो गई है।

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