15 हजार का इनामी इमलाख उर्फ इमलाक गिरफ्तार, फर्जी डिग्री और कूटरचित दस्तावेज़ बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो फर्जी डॉक्टर भी दबोचे

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर की थाना छपार पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने फर्जी डिग्री और कूटरचित दस्तावेज़ तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 15 हजार रुपये के इनामी और वांछित आरोपी इमलाख उर्फ इमलाक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में इमलाख उर्फ इमलाक पुत्र मोहम्मद इलियास निवासी ग्राम शेरपुर, डॉ. वी.के. गौतम तथा डॉ. मंसूर उलहक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन, क्षेत्राधिकारी सदर विनय कुमार द्विवेदी, थाना छपार प्रभारी मोहित कुमार तथा एसओजी प्रभारी मोहित चौधरी के नेतृत्व में की गई।

आईजीआरएस शिकायत से खुला पूरा फर्जीवाड़ा

पुलिस के अनुसार, आईजीआरएस पोर्टल पर एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इमलाख उर्फ इमलाक ने पैसे लेकर धोखाधड़ी की, मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए और अतिरिक्त धन की मांग की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इमलाख लंबे समय से पैसों के बदले फर्जी डिग्रियां और कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने का काम कर रहा था। इसके बाद थाना छपार में मुकदमा दर्ज किया गया और इमलाख पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।

भागने की फिराक में थे, पुलिस ने दबोचा

5 जुलाई को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ताजपुर रजवाहा-बरला बसेड़ा रोड पर घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इमलाख उर्फ इमलाक, डॉ. वी.के. गौतम और डॉ. मंसूर उलहक के रूप में हुई।

पुलिस ने इनके कब्जे से 32 विजिटिंग कार्ड, 6 खाली लेटरहेड, 4 लिखित लेटरहेड, 4 मेडिकल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट/कवर, 6 मरीजों की बुकलेट, 3 मोबाइल फोन तथा UK17V-4005 नंबर की कार बरामद की है।

पूछताछ में आरोपी इमलाख ने किए बड़े खुलासे

पूछताछ में इमलाख उर्फ इमलाक ने पुलिस को बताया कि वह बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी का चेयरमैन और डायरेक्टर है तथा बी.फार्मा, डी.फार्मा और बीएएमएस की फर्जी डिग्रियां तैयार कराने का काम करता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले उत्तराखंड में भी इसी तरह के फर्जी डिग्री रैकेट में गिरफ्तार होकर करीब दो साल जेल में रह चुका है।

बिना डिग्री के अस्पताल चला रहा था डॉ. वी.के. गौतम

गिरफ्तार आरोपी डॉ. वी.के. गौतम ने पूछताछ में बताया कि वह हरिद्वार के रुड़की रोड स्थित हिमालयन मेडिकेयर डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन कर रहा था, जबकि उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री नहीं है। उसने पुलिस को बताया कि उसने बीएएमएस की फर्जी डिग्री बनवाने के लिए 6 लाख रुपये इमलाख को दिए थे, लेकिन डिग्री अब तक नहीं मिली। उसके विजिटिंग कार्ड पर Dr. V.K. Gautam (M.S.) लिखा हुआ था, जबकि वह इस योग्यता का कोई प्रमाण नहीं दिखा सका।

डॉ. मंसूर उलहक ने भी कबूला अपना रोल

तीसरे आरोपी डॉ. मंसूर उलहक ने पुलिस को बताया कि उसने डॉ. वी.के. गौतम से फर्जी डिग्री बनवाने के लिए पैसे लिए थे। उसने अपना कमीशन रखने के बाद बाकी रकम इमलाख को दे दी थी। डिग्री तैयार न होने पर वह दोनों के बीच समझौता कराने आया था, तभी पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

मुख्य आरोपी पर पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इमलाख उर्फ इमलाक के खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, जालसाजी, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में 11 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह पहले भी फर्जी डिग्री और अन्य आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है।

अब पूरे नेटवर्क की होगी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराईं, कितने अस्पताल और क्लीनिक इन डिग्रियों के आधार पर संचालित हो रहे हैं तथा इस रैकेट से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य सामग्री की फोरेंसिक व तकनीकी जांच कर नेटवर्क की पूरी परतें खोली जाएंगी।

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