मंत्री की चेतावनी के बावजूद कार्रवाई, बिजली विभाग की तहरीर पर 4 नामजद समेत 15-20 अज्ञात पर मुकदमा दर्ज

मुजफ्फरनगर। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की कथित चेतावनी और मुख्य अभियंता से हुई फोन वार्ता के बाद भी नई मंडी कोतवाली पुलिस ने बिजली विभाग की तहरीर पर चार नामजद समेत 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद मामला जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अवर अभियंता ने दर्ज कराई रिपोर्ट

नई मंडी कोतवाली में दर्ज एफआईआर के अनुसार, अवर अभियंता (तकनीकी) रमनजीत सिंह ने बताया कि 27 जून 2026 को गांधी वाटिका फीडर से जुड़े 400 केवीए ट्रांसफार्मर में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। विभागीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद सुबह करीब 9:30 बजे नया ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल करने का कार्य किया जा रहा था।

लाइनमैन को रोकने और बिजली बाधित करने का आरोप

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान मोनू, आशु बालियान, अभिषेक त्यागी तथा एक अन्य नामजद व्यक्ति अपने 15-20 साथियों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने लाइनमैन सुधीर कुमार पुत्र ओमप्रकाश को जबरन रोक लिया और उसे बंधक बना लिया। इसके चलते गांधी वाटिका फीडर से जुड़े लगभग एक हजार उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई।

सरकारी कार्य में बाधा और अभद्रता का आरोप

बिजली विभाग का आरोप है कि कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और विभाग की कार्यप्रणाली में व्यवधान उत्पन्न किया गया। विभाग ने इसे सरकारी कार्य में अवरोध डालने का गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

अवर अभियंता रमनजीत सिंह की तहरीर के आधार पर नई मंडी कोतवाली पुलिस ने मोनू, आशु बालियान, अभिषेक त्यागी, एक अन्य नामजद तथा 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(2), 127(2) और 121(1) के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

मंत्री के बयान के बाद भी हुई कानूनी कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार का एक वीडियो और मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता से हुई उनकी फोन वार्ता सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी थी। वीडियो में मंत्री कथित तौर पर यह कहते सुनाई दिए थे कि यदि मुकदमा दर्ज किया गया तो इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे। इसके बावजूद पुलिस ने बिजली विभाग की तहरीर के आधार पर विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली।

पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मुकदमा दर्ज होने के बाद यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।

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