यूपी में गन्ना संकट गहराया: धर्मेंद्र मलिक ने सीएम को लिखा पत्र, 3200 करोड़ नुकसान का दावा

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते गन्ना उत्पादन पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा पेराई सत्र 2025-26 में उत्पादन में गिरावट के कारण किसानों को करीब 3200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट बनता जा रहा है।

पत्र में बताया गया कि पिछले तीन वर्षों से गन्ना उत्पादन में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। पेराई के आंकड़े भी गिरावट की पुष्टि करते हैं—जहां 2017-18 में यह आंकड़ा 1111 लाख टन से अधिक था, वहीं 2025-26 में घटकर करीब 875 लाख टन रह गया। इसका सीधा असर किसानों की आय और रोजगार पर पड़ा है। विशेष रूप से मुजफ्फरनगर में लगभग 800 करोड़ और बिजनौर में 520 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया गया है।

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि प्रदेश में करीब 45 लाख गन्ना किसान और लाखों मजदूर परिवार इस फसल पर निर्भर हैं, ऐसे में यह गिरावट सिर्फ कृषि नहीं बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। उन्होंने गन्ना क्षेत्र को “संक्रमण काल” में बताते हुए चेतावनी दी कि समय रहते ठोस और वैज्ञानिक फैसले नहीं लिए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

पत्र में गन्ना उत्पादन में गिरावट के कई कारण भी गिनाए गए हैं, जिनमें एक ही प्रजाति (Co-0238) पर अत्यधिक निर्भरता, कीटों का बढ़ता प्रकोप, कीटनाशकों की गुणवत्ता पर नियंत्रण का अभाव, कृषि विभाग और शोध संस्थानों के बीच तालमेल की कमी, और शुगर मिलों की बढ़ती दखलंदाजी शामिल हैं। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जैविक कार्बन की कमी को भी अहम कारण बताया गया है।

भाकियू (अराजनैतिक) ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि गन्ना उत्पादन को बचाने के लिए तुरंत प्रभाव से वैज्ञानिक कीट प्रबंधन नीति लागू की जाए, उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए, नई रोग-प्रतिरोधी प्रजातियों का विकास किया जाए और किसानों को बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाए। इसके अलावा कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच और शुगर मिलों की भूमिका को पारदर्शी बनाने की भी मांग की गई है।

धर्मेंद्र मलिक ने अपने पत्र में कहा कि गन्ना सिर्फ एक फसल नहीं बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए इस संकट पर जल्द ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।

 

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