राजनीतिक भागीदारी में एक है ब्राह्मण- भूमिहार ,अन्य किसी आयोजन में कर दिया जाता है दरकिनार
विजित त्यागी
मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर में आज भगवान परशुराम जी की शोभा यात्रा बड़ी धूमधाम से निकाली गई , अगले 2 दिन बाद भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा ।
इस यात्रा में एक ओर ध्यान दिलाया , शोभायात्रा के होर्डिंग शहर से लेकर गांव देहात लगे हुए थे , सभी पर गणमान्य ब्राह्मण समाज के व्यक्तियों के फोटो थे , तो संभवतः निमंत्रण भी समस्त जिले में ही दिया गया होगा ।
परन्तु त्यागी भूमिहार समाज को इस जन्मोत्सव से दूर रखा गया , ना कोई निमंत्रण ओर ना सूचना ओर ना ही समाज के किसी व्यक्ति का होर्डिंग कही भी लगाया गया ।
हालांकि राजनीतिक हिस्सेदारी मांगनी हो या वोट बैंक की बात हो तो त्यागी ओर ब्राह्मण एक साथ गिने जाते है और उसी अनुसार ब्राह्मण हिस्सेदारी मांगते है परन्तु आज के इस मामले के बाद त्यागी समाज को स्वयं विचार करना चाहिए की आपकी स्थिति या उपयोगिता क्या है और उसका प्रयोग हम क्यों करने दे रहे है ।
ये विचारणीय है ।
हालांकि इसके बाद त्यागी समाज के एक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी उस कार्यक्रम में देखे गए तो ये भी कहा जा सकता है की उनकी मौजूदगी थी , परन्तु समाज में उनसे अलग ओर भी राजनीतिक व सामाजिक व्यक्ति है जिनके आव्हान पर समाज एक साथ खड़ा होता है , उन्हें तक बुलाना उचित नहीं समझा गया, जिसका विचार अब अगले राजनीतिक सत्र में किया जाना आवश्यक है।
आपको बता दे उमेश शर्मा वाले प्रकरण में त्यागी समाज बकायदा कंधे से कंधा मिलाकर ब्राह्मण समाज के साथ खड़ा रहा , हर संभव प्रयास किए पर अंततः समाज को ये अपमान ही मिला।

