गोरखपुर। देखने में अच्छी और सेहतमंद मानकर जो मिक्स दाल आप खरीद रहे हैं, वह जहरीली हो सकती है। मिलाटवखोरों ने दाल को लाल, पीले और काले रंग से रंगकर बेचना शुरू कर दिया है। पीपीगंज में दो महीने पहले मिक्स दाल का लिया गया नमूना फेल हो गया है। दाल रंगकर बेची जा रही थी। केमिकल युक्त रंग के कारण पेट के रोग होने की आशंका बनी रहती है।
दाल को प्रोटीन का स्रोत माना जाता है। ज्यादातर घरों में रोजाना दाल बनाई जाती है। इसकी मांग ज्यादा होती है। कम पैदावार और अधिक मांग के कारण दाल का रेट हमेशा ज्यादा रहता है। इस कारण मिलावटखोर दाल में खूब मिलावट करते हैं। अरहर की दाल में खेसारी की दाल की मिलावट आम बात हो गई है। इसकी बिक्री ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से हो जाती है। ग्रामीण सस्ते के चक्कर में मिलावटी दाल खरीदते हैं।

ज्यादा चमकीली दाल तो जरूर परख लें

मिलावटी दाल बेचने के लिए इसे रंग से रंगना आम बात हो गई है। चना की दाल को रंगकर चमकीला बनाया जा रहा है। उड़द की दाल को काले रंग से रंग कर बेचा जा रहा है। अरहर की दाल में खेसारी मिला दी जा रही है।

ऐसे पहचानें मिलावटी दाल

  • दाल की चमक जरूरत से ज्यादा हो तो इसे रंगा गया है।
  • अरहर की दाल में यदि छिलका लगा हो तो यह सबसे शुद्ध मानी जाती है, इसका रंग भी हल्का होता है।
  • दाल को पानी में डालने पर रंग छोड़ने लगे तो जान जाएं कि रंग मिलाया गया है।

केमिकल युक्त रंग पेट में जाने पर पाचन क्रिया को प्रभावित करते हैं। खाद्य पदार्थों में मिलावट के कारण लोगों के पेट में संक्रमण, लिवर में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्वसनीय दुकानों से खरीद करें और मिलावट की जांच कर लें। यदि पेट से जुड़ी समस्या हो रही है तो अपने मन से दवा का सेवन न करें। विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही दवाएं लें। -डा. अखिलेश कुमार सिंह, वरिष्ठ फिजिशियन

खेसारी दाल के नुकसान

न्यूरोलाजिकल दिक्कत होती है, शरीर के निचले हिस्से में लकवा और रीढ़ की हड्डी में सुन्नता आ सकती है, ज्यादा सेवन से पक्षघात और गठिया रोग भी हो सकता है।

पीपीगंज में सड़क किनारे बिक रही मिक्स दाल के नमूने लिए गए थे। इनमें लाल, पीला और काला रंग मिला है। यानी मिक्स के नाम पर दाल रंगकर बेची जा रही थी। दुकानदार के बारे में पूरी जानकारी के लिए पीपीगंज पुलिस को लिखा गया है। उपभोक्ता खुद भी दाल की गुणवत्ता की परख कर सकते हैं। पानी में डालने पर यदि रंग छूटता है तो दाल मिलावटी है। -डा. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य

आठ नमूने हो चुके हैं फेल

वर्तमान वित्तीय वर्ष में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दाल के 47 नमूने लिए थे। इनमें से 25 नमूने अधोमानक और आठ नमूने असुरक्षित मिले। यानी इनका इस्तेमाल मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
अब तक फेल हुए सभी पदार्थों के नमूने में सबसे ज्यादा संख्या दाल की है। इसे देखकर अधिकारी भी चिंतित हैं। वह लोगों को जागरूक करने में जुटे हैं। जगह-जगह जांच वाली वैन भेजकर लोगों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निश्शुल्क जांच का भी अनुरोध कर रहे हैं।

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