गोरखपुर। रेलवे बोर्ड ने पूर्ण दृष्टिबाधित दिव्यांगों की दो नई श्रेणी परिभाषित कर उन्हें भी रेल किराए में रियायत देने की व्यवस्था बनाई है। अब 100 प्रतिशत से कम दृष्टिबाधित को भी किराए में छूट मिलेगी। विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र पर 90 प्रतिशत और उससे अधिक की दृष्टिहीनता दर्ज होने पर भी रेल यात्री इसका लाभ पा सकेंगे।
बोर्ड ने मौजूदा नियम में संशोधन कर सभी जोन के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधकों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पूर्ण दृष्टबाधित को ही किराए में रियायत मिलती है। भारतीय रेलवे स्तर पर लागू होने जा रही नई व्यवस्था के तहत ‘दृष्टिहीन’ प्रोफार्मा तैयार किया गया है। रेलवे प्रशासन अब इसी प्रोफार्मा पर दिव्यांगजन पहचान पत्र जारी करेगा।
बोर्ड की नई व्यवस्था के अनुसार दृष्टिहीनों के लिए बनाई गई नई परिभाषा के आधार पर ही नये पहचान पत्र जारी व पुराने का नवीनीकरण होगा। 25 वर्ष तक की आयु के व्यक्तियों के लिए पांच वर्ष, 26 से 35 वर्ष तक के आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए दस वर्ष और 35 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह आजीवन वैध रहेगा।
प्रमाण पत्र की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद नया प्रमाण पत्र बनवाना होगा। जहां विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र का उपयोग होता है, वहां रेलवे दिव्यांगजन पहचान पत्र की वैधता भी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र के समान होगी। देश में पूरी जनसंख्या का 2.21 प्रतिशत दिव्यांग और उसमें .3 प्रतिशत दृष्टिहीन हैं।

किराये में मिलती है 50 से 75 प्रतिशत की छूट

पूर्ण दृष्टिबाधित यात्रियों व उनके साथ चलने वाले को वातानुकूलित प्रथम और द्वितीय श्रेणी के किराये में 50 प्रतिशत तथा वातानुकूलित तृतीय, स्लीपर व साधारण द्वितीय श्रेणी के किराये में 75 प्रतिशत की छूट मिलती है। अब कम दृष्टिबाधित को भी इस रियायत का लाभ मिलेगा।

नई व्यवस्था में इन्हें मिलेगी रियायत

  • पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित।
  • बेहतर आंख में दृष्टि तीक्ष्णता स्नेलन के चार्ट द्वारा 3/80 या 10/200 से कम होने पर।
  • बेहतर आंख में 10 डिग्री से कम कोण एंगल को घटाने वाली दृष्टि के क्षेत्र की सीमा होने पर।

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