महाकुंभ के दौरान एक विवादास्पद घटना सामने आई, जिसमें आचार्य प्रशांत के नाम से झूठे पोस्टर के जरिए फेक न्यूज़ प्रचारित करी। इन पोस्टरों में दावा किया गया था कि आचार्य प्रशांत ने कुंभ मेले को अंधविश्वास करार दिया है। इस पोस्टर का असर यह हुआ कि कुछ लोगों ने कुंभ में वितरित की जा रही आचार्य प्रशांत द्वारा लिखित धार्मिक पुस्तकों – भगवद गीता, उपनिषद, महाभारत, दुर्गा सप्तशती, शिव सूत्र और रामायण – को आग लगा दी।
हालांकि, आचार्य प्रशांत ने कुंभ के बारे में ऐसा कोई बयान कभी नहीं दिया। इसके विपरीत, आचार्य प्रशांत कुंभ की समस्त परंपराओं के गहन और धर्मसम्मत अर्थ को जन-जन तक पहुंचाने में सदैव अग्रणी रहे हैं। उनका हमेशा कहना रहा है कि कुंभ एक अद्भुत सामुदायिक मिलन है, जहां लोग विभिन्न संस्कृतियों और विश्वासों के बावजूद एकजुट होते हैं। उन्होंने इसे भारत की सहिष्णुता की एक अनूठी मिसाल बताया।
यह घटना केवल एक झूठी खबर फैलाने का परिणाम थी, जो कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा प्रसारित की गई। इसमें शामिल कुछ प्रमुख नामों में जयपुर डायलॉग्स के संजय दीक्षित, इंडिया स्पीक्स डेली के संजय देव, और एबीपी न्यूज शामिल हैं।
महाकुंभ जैसे पवित्र अवसर पर इस प्रकार की साजिश और धार्मिक पुस्तकों को जलाने की घटना अत्यंत निंदनीय है। यह एक जागरूक समाज के लिए चेतावनी है कि किसी भी खबर को सत्यापित किए बिना स्वीकार करना कितना घातक हो सकता है।
✍️ आशीष कुमार
नोएडा

