यौमे आज़ादी पर पैग़ाम-ए-इंसानियत के बैनर तले हुआ शानदार मुशायरा
‘ख़्वाब ही टूट गया पेड़ की हर हर डाली का,आपसे फ़र्ज़ निभाया न गया माली का’
मुज़फ़्फ़रनगर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द को समर्पित सामाजिक संस्था पैग़ाम-ए-इंसानियत के तत्वावधान में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन संस्था के कार्यालय मेरठ रोड स्थित रहमानिया कॉलोनी में आयोजित किया गया।जिसकी अध्यक्षता पूर्व सांसद अमीर आलम खां ने की। मुख्य अतिथि सांसद हरेन्द्र मलिक रहे। विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद क़ादिर राणा व वरिष्ठ भाजपा नेता व चेयरपर्सन पति गौरव स्वरूप मौजूद रहे।मुशायरे की शमा रोशन किसान नेता व भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के द्वारा की गई। संचालन शायर रियाज़ साग़र ने व सरपरस्ती की ज़िम्मेदारी फरीद पाशा आज़ाद ने अंजाम दी।

इससे पूर्व पैग़ाम ए इंसानियत के अध्यक्ष आसिफ राही ने देश की आज़ादी में बलिदान देने वाले वीर सपूतों को याद करते हुए उन्हे श्रद्धांजली पेश की।इस अवसर शायरों और कवियों ने शानदार अशआर पेश करके समां बाँध दिया !
आलमी शायर तनवीर गौहर ने कहा..
पहले हसद की आग को दिल से निकालिये।जलते हुए मकां पे फिर पानी डालिये।।

अहमद मुज़फ़्फ़रनगरी ने पढ़ा..
अहले वतन से मिलके गले हर बरस।
होली दिवाली ईद मनानी यही की है।।
अब्दुल हक़ सहर मुज़फ़्फ़रनगरी कुछ इस अंदाज़ में दिखे..
है मेरे इर्द गिर्द सियासत के दायरे।
फिर भी बना रहा हूँ मोहब्बत के दायरे।
फ़ारुक़ बिजनौरी ने कहा..
मेरे जूनून ए इश्क़ का आलम तो देखिये।उसके सिवा नज़र मुझे आता नहीं,कोई इंसान ने ही कर दिया इंसानियत का ख़ून।लाशे पड़ी हुई हैं उठाता नहीं कोई।
अल्ताफ़ मशअल ने पढ़ा…
अश्क़ आँखों से बहेंगे तो तमाशा होगा
दर्द को दिल की पनाहों में छुपा रहने दो।

सलामत राही का अपना अंदाज़ नज़र आया..
नफरत को ख़त्म कीजिए उल्फत बढ़ाइये।ग़म के अंधेरे सबके दिलों से मिटाइये।महरो वफ़ा ख़ुलूस के दाने बखेर कर सारे जहाँ में फसले मोहब्बत उगाइये।
डॉ. सदाक़त देवबंदी ने पढ़ा..
हो उजालों की यहाँ कैसे हुकूमत क़ायम।इक दिया जलते ही पुरज़ोर हवा चलती है।
चौकस देवबंदी ने कहा..
चढ़ने लगा गाल मेरा मेरे गाल पर
में जा रहा हूँ फूलता चंदे के माल पर
जो कह रहे थे साथ निभाएंगे उम्र भर
पिटने लगा तो छोड़ गए मेरे हाल पर।
नवेद अंजुम ने पढ़ा..
ख़्वाब ही टूट गया पेड़ की हर हर डाली का।आप से फ़र्ज़ निभाया न गया माली का।
खुर्शीद हैदर ने अपना कलाम पेश किया..
भारत की मिट्टी से मेरा मां बेटे का रिश्ता है।इसकी जानिब तीर चला तो सीना मैने खोल दिया।
सलीम अहमद सलीम ने कहा..
मेरे जज़्बात मुझसे कहते हैं
मै वतन पर शहीद हो जाऊं।
दुश्मनो के उड़ा दूं परखच्चे
वीर अब्दुल हमीद हो जाऊ।
रियाज़ साग़र का यह अंदाज़ पसंदीदा रहा..
हमने हर मुश्किल हमेशा मिलके ही आसान की।
आओ फिर लिखें तक़दीर हिंदुस्तान की।

इस अवसर पर मुख्य रूप से,अशोक अग्रवाल,सo सुखदर्शन सिंह बेदी, पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत रमा नागर,सo बलजीत सिंह,सुमित मलिक,बिजेन्द्र मलिक,सपा नेता राकेश शर्मा,राम किशोर शर्मा, चांदवीर तोमर,कपिल मलिक, पंकज शर्मा,स्वास्तिक भारद्वाज,शहर काज़ी तनवीर आलम,इकराम कस्सार,गौहर सिद्दीकी,चरथावल चैयरमेन इस्लाम त्यागी,जिला पंचायत सदस्य राफे खां,जमीयत उलेमा जिला सचिव मूसा क़ासमी,ज़ीशान सुल्तान,कलीम त्यागी,तहसीन अली ,बदर खान, दिलशाद पहलवान ,शाहिद आलम सभासद,अन्नू कुरैशी सभासद,नौशाद कुरैशी सभासद, गुलरेज़ आढ़ती,तारिक कुरैशी,निसार खांन,शोबी खान,शैंकी खान, हसीब राना सभासद,असद फारूकी,असद पाशा , मुहम्मद अली अल्वी,महबूब आलम एडवोकेट, इशरत त्यागी,नईम कस्सार,शमीम कस्सार, शाहवेज़ राव,साजिद त्यागी, अमीर आज़म कल्लू ,फैज़ान अंसारी,दिलशाद अंसारी,आज़म खान,अशरफ कस्सार,आरिफ एड.मौजूद रहे।

