मुजफ्फरनगर: पत्रकार भूपेंद्र कुमार की पत्नी की मौत के मामले में लापरवाही के आरोप, डीएम उमेश मिश्रा ने दिए जांच के आदेश

मुजफ्फरनगर। पत्रकार भूपेंद्र कुमार की पत्नी पिंकी चौधरी की जानसठ रोड स्थित SKB आरोग्यम अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों को लेकर गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार बिनेश पवार, प्रदीप शर्मा, डॉ. प्रवीण, योगेश त्यागी, अनुज मुद्गल सहित अन्य पत्रकारों ने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा से मुलाकात की और पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

पत्रकारों ने जिलाधिकारी को बताया कि पिंकी चौधरी की 15 अक्टूबर की रात अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस मामले में इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। पत्रकारों ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।

मेडिकल रिपोर्ट और इलाज को लेकर उठाए सवाल

पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने भी इस मामले में अस्पताल के इलाज और मेडिकल रिपोर्टों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, पिंकी चौधरी को 13 अक्टूबर की रात गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल की केस शीट और डेथ समरी में फेफड़ों के संक्रमण (LRTI) और सेप्सिस का उल्लेख किया गया, जबकि 14 अक्टूबर की सुबह किए गए चेस्ट एक्स-रे की रिपोर्ट में दोनों फेफड़ों के क्षेत्र साफ बताए गए थे।

अशोक बालियान ने आरोप लगाया कि एक्स-रे रिपोर्ट और अस्पताल की डायग्नोसिस के बीच कथित विरोधाभास के बावजूद इलाज की दिशा में आवश्यक बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने हृदय संबंधी समस्या या अन्य गंभीर कारणों की जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह और मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने में कथित देरी पर भी सवाल उठाए।

मेडिकल बोर्ड से जांच कराने की मांग

अशोक बालियान के मुताबिक, इलाज के दौरान करीब 21,550 रुपये का बिल बनाया गया और कई दवाइयां बाहर से मंगवाई गईं। उन्होंने इस प्रकरण में जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत भेजकर मेडिकल बोर्ड गठित कर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, जांच में लापरवाही साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।

फिलहाल, अस्पताल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिलाधिकारी द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट से ही इलाज की प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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