‘सत्ता की मलाई के लिए अल्पसंख्यकों से किनारा’, रालोद की चुप्पी पर नावेद रंगरेज का तीखा हमला
मुजफ्फरनगर: समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया इंचार्ज नावेद रंगरेज ने राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेतृत्व और बिजनौर लोकसभा सांसद चंदन चौहान पर निशाना साधते हुए रालोद की राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव और रैलियों के दौरान मुस्लिम समाज के बीच पहुंच बनाने वाली रालोद सत्ता में रहते हुए अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी साध लेती है।
नावेद रंगरेज ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी और सांसद चंदन चौहान को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भाजपा की कथित जनविरोधी और विभाजनकारी नीतियों को लेकर उनका वास्तविक राजनीतिक रुख क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि रैलियों और चुनाव के समय ‘36 बिरादरी’ तथा मुस्लिम भाईचारे की बातें की जाती हैं, लेकिन जब समाज के सम्मान, सुरक्षा और इबादतगाहों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की जरूरत होती है, तब रालोद नेतृत्व की चुप्पी सामने आती है।
नावेद रंगरेज ने कहा, “रालोद प्रमुख जयंत चौधरी और सांसद चंदन चौहान यह साफ करें कि भाजपा की जनविरोधी और बांटने वाली नीतियों के खिलाफ उनका क्या स्टैंड है? जब तक चुनाव और रैलियां होती हैं, तब तक रालोद को ‘36 बिरादरी’ और मुस्लिम भाईचारे की याद आती है। लेकिन सत्ता की मलाई खाते वक्त इनके मुंह पर ताला लग जाता है।”
उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज अब राजनीतिक दलों के बयानों और उनके व्यवहार के बीच अंतर को समझ रहा है। उनके मुताबिक, जनता यह देख रही है कि कौन सा दल केवल चुनाव के दौरान संपर्क करता है और कौन समाज से जुड़े मुद्दों पर लगातार अपनी आवाज उठाता है।
सपा नेता ने कहा कि समाजवादी पार्टी हर वर्ग के संवैधानिक अधिकारों, सम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ती रही है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता आने वाले समय में कथित अवसरवादी राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अपने वोट की ताकत से देगी।
नावेद रंगरेज ने रालोद नेतृत्व से सवाल किया कि यदि पार्टी वास्तव में सभी वर्गों के हितों की राजनीति करती है, तो उसे संवेदनशील सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करना चाहिए।
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