मुजफ्फरनगर के कृष्णापुरी में मोबाइल टावर को लेकर घमासान, मकानों पर लगे ‘पलायन’ और ‘बीजेपी बहिष्कार’ के पोस्टर; विधायक कपिल देव अग्रवाल से समाधान न मिलने का आरोप
रोहित त्यागी
मुजफ्फरनगर के दक्षिण कृष्णापुरी मोहल्ले में तीन मंजिला मकान पर मोबाइल टावर लगाए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। करीब ढाई से तीन महीने से चल रहे विरोध के बीच अब स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। मोहल्लेवासियों ने अपने मकानों पर ‘पलायन’ और ‘बीजेपी बहिष्कार’ के पोस्टर लगा दिए हैं और टावर का निर्माण नहीं रुकने पर आगामी चुनाव में बीजेपी को वोट नहीं देने की चेतावनी दी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस तीन मंजिला मकान पर मोबाइल टावर लगाया जा रहा है, उसकी मजबूती को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि आंधी या तेज तूफान की स्थिति में टावर गिरने से आसपास के मकानों और लोगों को खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा कुछ निवासियों ने मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन को लेकर भी स्वास्थ्य संबंधी आशंकाएं जताई हैं।
मोहल्लेवासियों के मुताबिक, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) और इंजीनियरों द्वारा जांच किए जाने के बाद संबंधित मकान को टावर लगाने के लिए ‘अनफिट’ बताया गया है। लोगों का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय विधायक एवं प्रदेश सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल से भी समस्या के समाधान की मांग की, लेकिन उनकी शिकायत का कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यदि टावर का निर्माण नहीं रोका गया तो उनका आंदोलन और तेज होगा। इसी के चलते कई मकानों पर ‘पलायन’ और ‘बीजेपी बहिष्कार’ जैसे पोस्टर लगाए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है।
वहीं, मकान मालिक शिवकुमार त्यागी ने स्थानीय लोगों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मोबाइल कंपनी द्वारा लगाया जा रहा टावर सरकार द्वारा निर्धारित मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी मंजूरी और कंपनी के इंजीनियरों की जांच के बाद ही टावर लगाने की अनुमति मिली है और उनके पास कंपनी से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं।
शिवकुमार त्यागी का आरोप है कि मोहल्ले के कुछ लोग इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मोहल्लेवासियों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन टावर लगाने की प्रक्रिया में अब तक करीब 5 लाख रुपये का खर्च हो चुका है। यदि निर्माण कार्य रोक दिया जाता है तो कंपनी को यह राशि उन्हें अपनी जेब से चुकानी पड़ सकती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा।
फिलहाल टावर लगाने को लेकर स्थानीय निवासियों और मकान मालिक के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। एक ओर लोग मकान की मजबूती, सुरक्षा और टावर को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं, तो दूसरी ओर मकान मालिक का दावा है कि सभी जरूरी अनुमति और तकनीकी जांच के बाद ही निर्माण कराया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट समाधान नहीं निकलने से कृष्णापुरी क्षेत्र में विवाद और तनाव बढ़ता नजर आ रहा है।
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