गंगा में नॉनवेज कचरा फेंकने से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Anuj Tyagi
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी करने और कथित तौर पर नॉनवेज कचरा नदी में फेंकने के मामले में सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि गंगा में मांसाहारी भोजन का कचरा डालने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।
हालांकि, अदालत ने मामले के 8 आरोपियों को जमानत दे दी। कोर्ट ने यह फैसला उनके साफ आपराधिक रिकॉर्ड, जेल में बिताई गई अवधि और बिना शर्त माफी को ध्यान में रखते हुए दिया।
मामले में कुल 14 आरोपी थे, जिनमें से दो अलग-अलग बेंच ने 8 को जमानत दी। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 5 आरोपियों को राहत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 अन्य आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार की। शेष 6 आरोपियों की जमानत पर अभी निर्णय बाकी है।
कोर्ट ने अपने 16 पन्नों के आदेश में कहा कि भले ही यह कृत्य आपत्तिजनक प्रतीत होता है, लेकिन आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की है और पश्चाताप व्यक्त किया है, जिससे उन्हें जमानत का लाभ दिया जा सकता है।
यह मामला 17 मार्च का है, जब वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने और भोजन व कचरा नदी में फेंकने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने सभी 14 लोगों को गिरफ्तार किया था।
इस घटना के बाद सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा, जबकि कई लोगों ने तर्क दिया कि गंगा पहले से ही प्रदूषण और विभिन्न प्रकार के कचरे से प्रभावित है, फिर भी उसकी पवित्रता को लेकर अलग-अलग राय सामने आती रही है।
गंगा की सफाई और ‘नमामि गंगे’ जैसी योजनाओं पर भी इस बहस के बीच फिर से सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नदी की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।
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