मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग के ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, 25 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू
दो वर्षों से भुगतान लंबित होने का आरोप, 50 से 60 ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझने का कर रहे दावा; 11 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की मांग
मुजफ्फरनगर। जिले में सिंचाई विभाग के ठेकेदारों का बकाया भुगतान नहीं मिलने को लेकर आक्रोश बढ़ गया है। मंगलवार को महावीर चौक स्थित सिंचाई विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के बाहर ठेकेदारों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग में करीब 50 से 60 ठेकेदारों का लगभग 24 से 25 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले दो वर्षों से लंबित है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए बकाया धनराशि का तत्काल भुगतान कराने और अन्य समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
दो वर्षों से भुगतान लंबित होने का आरोप
धरने पर बैठे ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने सिंचाई विभाग से संबंधित विभिन्न कार्य कराए हैं, लेकिन कार्यों के सापेक्ष मिलने वाला भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ठेकेदारों के मुताबिक, करीब दो वर्षों से भुगतान लंबित होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। ठेकेदारों का दावा है कि बकाया राशि करीब 24 से 25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जिससे 50 से 60 ठेकेदार प्रभावित हैं।
ठेकेदार अभिषेक बंसल ने बताया कि शासन स्तर से भुगतान होने के बावजूद उन्हें बकाया धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि भुगतान में लगातार देरी होने के कारण ठेकेदारों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब उन्होंने अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठने का निर्णय लिया है।
11 सूत्रीय मांगों को लेकर खोला मोर्चा
ठेकेदारों ने केवल बकाया भुगतान ही नहीं, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी अपने मांग-पत्र में शामिल किया है। उनकी प्रमुख मांगों में लंबित भुगतान जारी करना, निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अनुबंध से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच कराना शामिल है।
ठेकेदारों का कहना है कि निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सभी संबंधित पक्षों को नियमों के अनुरूप अवसर मिल सके। इसके अलावा उन्होंने अनुबंध संबंधी मामलों में सामने आ रही समस्याओं की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।
ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि उनकी 11 सूत्रीय मांगों का समाधान करना आवश्यक है। उनके मुताबिक, लंबे समय से लंबित समस्याओं के कारण उनके कामकाज और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
24 घंटे में कार्रवाई शुरू करने की मांग
धरने पर बैठे ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी देते हुए मांग की है कि उनके 11 सूत्रीय मांग-पत्र पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही, की गई कार्रवाई के संबंध में उन्हें लिखित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
ठेकेदारों का कहना है कि केवल आश्वासन देने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। वे चाहते हैं कि लंबित भुगतान जारी करने की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए और अन्य मांगों पर भी ठोस कदम उठाए जाएं।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के कार्यालय के बाहर शुरू हुए इस धरने के माध्यम से ठेकेदारों ने अपनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से लंबित भुगतान को लेकर वे लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं और अब अपनी मांगों के समाधान के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
ठेकेदारों ने साफ किया कि जब तक बकाया भुगतान सहित उनकी 11 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। अब देखना होगा कि विभागीय अधिकारी ठेकेदारों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित भुगतान के मामले में कब तक समाधान निकल पाता है।

