अमरावती। देशभर में 5 अक्टूबर को दशहरा का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। हालांकि, आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में इस त्योहार की रौनक फीकी पड़ गई। दरअसल, देवरगट्टू गांव में बन्नी उत्सव के दौरान लाठियों से हमले में 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है।

जानकारी के अनुसार, यहां हर साल दशहरा के मौके पर आयोजित बन्नी उत्सव में डंडे मारे जाते हैं। परंपरा के चलते इस बार भी दो समूहों के लोगों ने एक-दूसरे पर डंडे बरसाए, इस दौरान 70 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों को अडोनी और अलूर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है। बन्नी उत्सव के दौरान कर्नाटक का रहने वाला एक बच्चा रविंद्रनाथ रेड्डी भी मृत पाया गया है। पुलिस को आशंका है कि उसकी मौत कार्डियक अरेस्ट के चलते हुई है।

पुलिस ने नहीं दी थी मंजूरी

गौरतलब है कि माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में हर साल दशहरा समारोह में छड़ी से लड़ाई की जाती है। इस बार पुलिस से इस आयोजन की मंजूरी नहीं थी, लेकिन फिर भी गांववालों ने अपनी परंपरा का हवाला देते हुए इसका आयोजन किया। वार्षिक उत्सव के तौर पर विभिन्न गांवों के लोग यहां देवता की मूर्तियों पर अपना नियंत्रण करने आते हैं। इसमें डंडे से लड़ाई के लिए लोग दो समूहो में इकट्ठा होते हैं।

चोट लगना माना जाता है शगुन

बन्नी उत्सव में शामिल होने वाले लोग डंडों से हमले में गंभीर रूप से घायल भी होते हैं, लेकिन भक्त इसे शगुन मानते हैं। ग्रामीणों को लड़ाई आयोजित करने से कई बार मना किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।ग्रामीणों का मानना ​​है कि भगवान शिव ने एक बार भैरव का रूप धारण किया था। तब भगवान शिव ने दो राक्षसों, मणि और मल्लसुर को लाठी से मार दिया था।

मूर्तियों पर नियंत्रण पाने की होती है कोशिश

बन्नी उत्सव में राक्षस की ओर से शामिल होने वाला समूह भगवान की ओर से शामिल होने वाले भक्तों से मूर्ति छीनने की कोशिश करता है। मूर्तियों पर अपना नियंत्रण करने के लिए दोनों समूह एक दूसरे पर लाठियों से हमला करते हैं। इसे देखने के लिए हजारों लोग शामिल भी होते हैं।

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