भाजपा के सियासी कार्यक्रमों में दलित समाज की बढ़ती सक्रियता बनी चर्चा का विषय

चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता भी दलित महापुरुषों की प्रतिमाओं पर कर रहे हैं माल्यार्पण

प्रशांत त्यागी, देवबंद।

सहारनपुर लोकसभा की राजनीति जिस प्रकार से धीरे-धीरे करवट ले रही है वह अपने आप में बड़ा ही दिलचस्प पहलू है। दलित समाज का भाजपा की ओर झुकाव यहां सियासत की नई केमिस्ट्री लिख रही है। दलित समाज के बीच भाजपा की बनती पैठ बसपा खेमे के लिए जरूर चिंता का विषय है।

सहारनपुर लोकसभा पर इस बार कांटे का मुकाबला देखने को मिल रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में दलित और मुस्लिम समीकरण के बलबूते चुनाव जीती बसपा इस बार फिर से चुनावी मैदान में उतरी है। पूर्व में जीते प्रत्याशी हाजी फजलुर रहमान द्वारा दलित समाज की अनदेखी करना और समाज के दुख सुख में शामिल न होना इस बार लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। जिस प्रकार से भाजपा ने दलित मतदाताओं को लेकर रणनीति तैयार की है वह अपने आप में एक बड़ी बात है।

भाजपा गांव दर गांव दलित समाज के लोगों के बीच पहुंच रही है और संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर व संत शिरोमणि रविदास महाराज के मंदिर में नतमस्तक हो रही है। पिछले कुछ दिनों में जिस प्रकार से भाजपा की जनसभा में दलित समाज की भारी मौजूद की और भाजपा के कार्यक्रमों में डॉ भीमराव अंबेडकर के जयकारे हो रहे हैं यह अपने बदलती सहारनपुर की राजनीति का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आ रहा है। आंकड़ों की बात करें तो सहारनपुर लोकसभा में करीब 3 लाख मतदाता हैं जो किसी भी राजनीतिक दल का खेल बिगड़ने में सक्षम है।‌ अगर इनमें से 30 से 35% मतदाता भी भाजपा के पहले में चला जाता है तो शायद पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा बड़े जीत के अंतर के साथ उलेट फेर कर सकती है। बात करें तो सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की रामपुर मनिहारान, सहारनपुर देहात, देवबंद समेत पांच लोकसभा क्षेत्र पर दलित मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। अगर दलित मतदाता भाजपा की ओर इस बार रुक करता है जिसके असर भी नजर आ रहे हैं तो अपने आप में भाजपा का सहारनपुर लोकसभा सीट पर यह बड़ा सफल प्रयोग साबित होगा। अब यहां आने वाला समय ही बताया कि 19 अप्रैल को दलित मतदाता किसी और रुख करते हैं यह अपने आप में बड़ा सवाल है?

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

सहारनपुर जनपद में दलित समाज के बीच बड़ी गहरी पैठ रखने वाले भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी सहारनपुर की राजनीति को लेकर चुप्पी सादे हुए हैं। वह इस समय नगीना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों की निगाहें चंद्रशेखर पर भी लगी हुई है।

बसपा के बड़े दलित नेता भाजपा के संपर्क में

सूत्रों की माने तो बसपा के अंदर दलित नेताओं के रूप में अपनी छवि बनाने वाले कुछ बड़े नेता भाजपा के संपर्क में है, सूत्र बताते हैं कि सहारनपुर में 14 अप्रैल को होने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली के बाद उक्त नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इनमें एक पूर्व विधायक समेत कई बड़े नेता शामिल हैं।

प्रशांत त्यागी

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