तुम लौट आओगे

खबरे सुने

मुझे लगा था
तुम लौट आओगे
जब होगी शाम
मेरे कांधे पर रख कर सर
आँखे मूंदे
हौले से मुस्कुराओगे
मुझे लगा था
तुम लौट आओगे
चाँदनी रातों के उजालों में
आसमानों को निहारते
मेरे साथ
मेरी हथेलियों पर
अपनी उंगलियों से
तुम मेरा नाम
लिख लिख कर दोहराओगे
मुझे लगा था
तुम लौट आओगे
जब बारिशों की महक से
सोंधी होगी फ़ज़ाए
नम होंगी हवाएँ
निखर रही होगी धरती
तुम हाथों में कुछ फूल लिए
घर के दरवाज़े थपथपाओगे
मुझे लगा था
तुम लौट आओगे

✒️ सिम्मी हसन

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