Home उत्तर प्रदेश बीता वर्ष ट्वेंटी ट्वेंटी

बीता वर्ष ट्वेंटी ट्वेंटी

बुलंदशहर उत्तर प्रदेश, बीता वर्ष ट्वेंटी ट्वेंटी ने लगभग सभी के परिवारों रिश्तेदारियों में किसी ना किसी को स्वर्ग पहुँचा देने की गम्भीर खबर से दुखी किया है। अस्थाई अकल्पनीय घटनाओं से भरा रहा है। जिस कारण कुछ लोग नव वर्ष का स्वागत ऐसे कर रहे थे मानो बीते वर्ष का विलाप कर रहे हों। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे एक जनवरी ईक्कीस आते ही मानो उनके जीवन में बहार आ जायेगी! कोरोना काल पूर्णतया समाप्त हो जायेगा। ट्वेंटी ट्वेंटी वर्ष को ऐसे पानी पी पीकर कोस रहे थे मानो उसे कूट रहे हों। वह वर्ष ना होकर कोई व्यक्ति हो! अरे भई! अब कोसकर क्या होगा? वह तो तुम्हें कूट कूटकर चला गया! जितना नुकसान पहुँचाना था पहुँचा गया। ऐसे कोसनीय महानुभावों को सोचना चाहिए कि नव वर्ष की तैयारी कर रहे हो तो सकारात्मक सोचो। जो होना था हो चुका! अब बीते वर्ष की विदाई और नव वर्ष का स्वागत शुभ शुभ बातों से करो।

आश्चर्य हो रहा था उनके विचारों को सुनकर जैसे जीवतं हो कोरोना वायरस नामक व्यक्ति। जो कि नव वर्ष के आने से ही घबराकर चला जायेगा। भविष्य में कभी नहीं आयेगा! जबकि हमें यह स्वीकार करना चाहिये कि विपदा कभी भी बोलकर नहीं आती है। विपदा सदैव बेजुवान बनी आहिस्ता से दबे पाँव ही आती है। जीवन में कुछ भी निश्चिंत नहीं! इसलिये तो बड़े बुजुर्ग कह गये है कि विपदा के लिये भी कुछ बचा कर रखो। जो भी कमाया है आज पूरा खर्च ना करो। पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख अंटी में माया, तीजा सुख संतान का, चौथा सुख समाज का…

हर दिन हमें कुछ सबक मिलता है यह बात अलग है हम कितना सीखते हैं और अमल करते हैं। विपत्ति तो सबसे बड़ा टीचर है जो हमें बहुत गहरे ज्ञान सिखाती है। यह हमें तय करना है कि हम सतह पर रहते हैं या गहरायी में उतरते हैं…

 

संगीता कुमारी (लेखिका / कवयित्री)

नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन, टाउन शिप,