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World Water Day: पानी की बढ़ती कमी आज हमें जल संरक्षण पर सोचने को मज़बूर कर दिया है

मानव की आवश्यकताएं इतनी बढ़ती जा रही है कि वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति का दोहन कर रहा है जिससे पर्यावरण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है और मौसम चक्र में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
पानी की बढ़ती कमी आज हमें जल संरक्षण के विषय पर सोचने को मजबूर कर रही है । स्थिति इतनी बुरी है कि कुछ इलाकों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भी तरस रहे हैं तो कहीं कहीं लोग पानी को पैसे से खरीद रहे हैं । लेकिन ऐसा कब तक चलेगा ?

मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए
-राहत इंदौरी

1993 से हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस ( world water day ) के रूप में मनाया जाता आ रहा है । इसकी शुरुआत 1992 में रियो डी जेनेरियो में हुए पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (United Nations Conference on Environment and Development) से हुई । इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने जल दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया । इसके पीछे यह औचित्य था की जल की अथाह उपलब्धता के बावजूद सभी के लिए पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है । इसी साफ पानी का संरक्षण करने के लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है ।
प्रति वर्ष विश्व जल दिवस की एक थीम होती है। इस वर्ष की थीम है “वेल्यूइंग” वाटर । देश दुनिया में रह रहे तमाम मानवजाति को जल की महत्ता समझाना और उन्हें इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना ही इस वर्ष के जल दिवस का मुख्य उद्देश्य है।

भारत में विश्व जल दिवस 2021 – प्रधान मंत्री मोदी विश्व जल दिवस के इस शुभ अवसर पर catch the rain ‘ जल शक्ति अभियान का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किये।

हमें ये बात अपने संज्ञान में लानी होगी कि हम स्वयं पानी का निर्माण नहीँ कर सकते अतः हमे पानी को दूषित करने से और उसके निरर्थक प्रयोग से बचना होगा । प्रकृति द्वारा दिए गए जल का सदुपयोग करना होगा । तभी हम अपनी इस धरा को और इस पर रह रहे समस्त जीव जंतुओं को बचा पायेंगे ।22 मार्च का दिन यह प्रण लेने का दिन है कि हर व्यक्ति को पानी बचाना है।

जल से ही हम तुम है
जल से ही जीवन है
जल का संरक्षण हमारा ही दायित्व है
जल के दुरुपयोग से बचना है
सबका जीवन बचाना है ।

दीक्षा त्रिपाठी ✍️