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गोरैया दिवस पर विशेष: पूर्व DGP के घर में है 100 से अधिक गोरैया का वास

आज गौरैया दिवस है। यह पक्षी हमेशा इंसानों के साथ रहती आयी है , जिसके कारण इसे अंग्रेज़ी में ‘House Sparrow’ कहा जाता है । अब इसकी संख्या तेज़ी से कम हो रही है। पहले मकान फूस, खपरैल के होते थे। दीवालों में ताखे बने होते थे, जिसमें गौरैया आसानी से तिनके रख कर अपने घोंसले बना लेती थी। अब मकान पक्के बन गये, गौरैया के घोंसले के लिए जगह ही नहीं बची। अब आवश्यकता है , गौरैया के लिए अलग से घोंसला की व्यवस्था।घोंसले में जाने का गोल रास्ता ज़्यादा बड़ा नहीं होना चाहिये, क्योंकि रास्ता बड़ा होने पर, बड़ी चिड़ियाँ उस पर क़ब्ज़ा कर सकती है और मांसाहारी चिड़ियाँ इनके अंडे बच्चों को खा सकती है। याद रखे – घोंसले को घर के पास ही लगाये।

पूर्व DGP बृजलाल अपने घर में गौरैया के लिए 35 घोंसले लगा रखे है और अब उनके यहाँ गोरैया की संख्या लगभग 100 पहुँच गयी है। इनके लिए दाना- पानी हमेशा रखना आवश्यक है। पूर्व DGP और वर्तमान में राज्य सभा सांसद बृजलाल बताते है कि वे गोरैया के लिए बाजरा, काकुन और टूटे चावल रखते हैं। बासी रोटी को मसल कर रखा जाता है, जिसे गौरैया बड़े चाव से खाती है।

एक तथ्य के मुताबिक चीन की कॉम्युनिस्ट पार्टी अध्यक्ष मावों तसे तुंग ने आदेश दिया था,कि देश की सभी गौरैया मार डाली जायँ, क्योंकि की ये फसलों को नुक़सान पहुँचती है। फिर क्या था, लोग शोर करके गौरैया के पीछे पड़ गये।उड़ती गौरैया थक कर नीचे गिर जाती थी और चीनी लोग उसे खा जाते थे |

गौरैया ख़त्म हो गयी और कीट- पतंगे इतने बढ़ गये कि फसलों को बर्बाद कर दिया। ये कीट- पतंगे गौरैया के भोजन थे। बाद में चीन ने रुस से गौरैया मँगा कर पुनः गौरैया को चीन में बसाया।

इस चीनी प्रयोग से हमें सीख लेनी चाहिये, की गौरैया पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए अति आवश्यक है। आइये हम सब गौरैया दिवस पर निश्चय करें, कि हमें हर हालत में गौरैया का संरक्षण करना है।