मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट किसका बनिया, बेचेगा धनिया

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मुजफ्फरनगर विधानसभा सीट किसका बनिया, बेचेगा धनिया!

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव को लेकर वैसे तो पूरे प्रदेश में ही राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। परंतु मुजफ्फर की विधानसभा सीट पर राजनीतिक माहौल उफान पर है।
यह सीट परंपरागत रूप से बनिया सीट के रूप में जानी जाती है। इस सीट पर 1952 से लेकर 2017 तक हुए कुल 17 चुनाव में 14 बार बनिया उम्मीदवार की को ही जीत हासिल हुई है भले ही वह किसी भी पार्टी का हो।
अपवाद स्वरूप 1969 में सैयद मुर्तजा ने बीकेडी के टिकट पर यहां से जीत हासिल की थी। 1970 में मालती शर्मा ने जनता पार्टी के टिकट पर विजय हासिल की थी। 1985 में चारुशीला ने कांग्रेस के टिकट पर विजय प्राप्त कर इतिहास बनाया था।
इस बार 2022 के चुनाव में भी माना जाता है कि इस सीट पर कोई बनिया ही विजय प्राप्त करेगा भले वह किसी पार्टी का हो।
यही वजह है कि भाजपा मैं वर्तमान विधायक कपिल देवका टिकट अगर कटता है तो प्राप्त करने वालों में भी राजीव गर्ग श्री मोहन तायल आदि पहले नंबर पर चल रहे हैं।

श्रीमोहन तायल

वहीं सपा रालोद के गठबंधन को लेकर चर्चा है कि अगर यह सीट सपा के पास गई तो भी कोई बनिया उम्मीदवार ही भाजपा के बनिया उम्मीदवार का सामना करेगा।
लेकिन अगर यह सीट रालोद के पास गई तो चर्चा है कि रालोद भी यहां से किसी बनिया उम्मीदवार को ही मैदान में उतारेगा। राजनीतिक सूत्रों की माने तो रालोद को ऐसे बनिए की तलाश है जो भाषा और रहन-सहन को लेकर जाट जैसा ही लगता हो । साथ ही उसे भारतीय किसान यूनियन का भी भरपूर समर्थन हो।
रालोद के सूत्रों का मानना है कि जाट जैसी भाषा बोलने वाला बनिया शहर की इस सीट पर जाटों को संजीव बालियान के चंगुल से निकालने में सफल रहेगा।
सूत्रों की माने तो अगर यह सीट रालोद के हिस्से में आई तो यहां से कमल मित्तल सबसे बड़े दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। माना जाता है कि वह भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत के बहुत ही करीबी हैं।
इसके अलावा कमल मित्तल धर्मनिरपेक्ष छवि भी रखते हैं।

कमल मित्तल

लेकिन अगर यह सीट सपा के हिस्से में गई तो सपा की तरफ से भी बनिया उम्मीदवार को ही प्राथमिकता दी जाएगी या फिर ब्राह्मण उम्मीदवार पर भी सपा दाव लगा सकती है।
सपा के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि शहर का बनिया सपा के बनिया उम्मीदवार को शायद ना पसंद करें।
ब्राह्मण उम्मीदवार के रूप में सपा के सामने राकेश शर्मा पहले नंबर के दावेदार बने हुए हैं। उन्होंने अभी हाल ही में विशाल ब्राह्मण सम्मेलन कर अपनी ताकत का परिचय भी दिया था।
देखना है कि रालोद और सपा मिलकर किस बनिया को मैदान में उतारते हैं।

राकेश शर्मा

मजेदार बात यह है कि इस सीट पर पक्ष और विपक्ष की तरफ से यदि बनिया उम्मीदवार ही आमने-सामने होते हैं तो एक बनिए को तो धनिया बेचना ही पड़ेगा।

विश्लेषण लेख

भारत भूषण
पूर्व ब्यूरो चीफ
हिंदुस्तान
मुजफ्फरनगर

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