Home कविता/शायरी हम तुम्हारे साथ हैं

हम तुम्हारे साथ हैं

निधि भार्गव मानवी

है तुम्हें किस बात का गम,हम तुम्हारे साथ हैं ।
क्या बिगाडे़गा ज़माना,हाथ में जब हाथ हैं ।
कर दिया खुद को समर्पित,प्यार में मैंने तुम्हें ।
उठ रहा तूफ़ान दिल में,बोलते जज़्बात हैं ।।

जो तुम्हारे साथ गुज़रे बस वही पल हैं हसीं
मन में है तुमसे उजाला तुमसे ही मेरी खुशी
थाम कर ये हाथ बालम बीच में मत छोड़ना
तू बसा इन धडकनों में और मैं तुझमें बसी

दिल चुराकर आप मेरा चल दिए बोलो कहां
मानके तुमको मैं बैठी हूं प्रिय अपना जहां
फल तपस्या का तुम्हीं हो करती हूं तुमको नमन
है जहाँ तेरा ठिकाना,ले मुझे भी चल वहाँ

प्रीत की मदहोशियां ये सब तुम्हारे नाम हैं ।
गीत चाहत के निरंतर गा रही ये शाम है
मिट गई दूरी दिलों की ब्याह अपना रच गया
क्या मुझे लेना जगत से इक तुम्हीं से काम है।