Home उत्तर प्रदेश शहीद प्रशांत शर्मा हुए पंचतत्व में विलीन

शहीद प्रशांत शर्मा हुए पंचतत्व में विलीन

राजसत्ता पोस्ट

मुजफ्फरनगर

(विकास बालियान)

समुद्र की लहर सा उमड़ता जनसमूह

बढ़ता ही जा रहा था

साथ ही गगनभेदी नारों से आसमान गुंजायमान हो रहा था

जब तक सूरज चांद रहेगा, प्रशांत शर्मा तेरा नाम रहेगा...”

वहीं एक रणबांकुरा धरती माँ के फ़र्ज़ को निभाकर उस सफर की और कूच कर रहा था, जहां जाना सभी को है।

मगर उस अनजान सफर की और उस रणबांकुरे को विदा करने के लिए हज़ारो लोग साथ थे।

सड़क पर पांव धरने की जगह नही थी तो, दुकानो- मकानों की छतें लोगो से भरी पड़ी थी और लोग पुष्पवर्षा कर रहे थे, अमर शहीद प्रशांत के उस जिस्म पर, जो 3-3 दुश्मनों को धराशायी करते करते खुद भी सीने पर कई गोलियां झेल कर मातृभूमि की रक्षा हेतु प्राणों की आहुति दे, बेजान हो गया था।

इधर सवेरे से आसमान जैसे रो रहा था, बार बार बूंदे गिर रही थी। फिर अचानक तेज धूप निकल आई ऐसा लगा जैसे खिली धूप कह रही हो, रो मत- वो वीर है, बहादुर है, बलिदानी है, वो हीरो है। वो कायर, गद्दार नही जो निर्दोषों की जान लेते हुए प्राण त्यागे हो। वो तो रक्षक है जो आसुरी मंसूबो, घृणा, नफरत, गद्दारी, छिप कर वार करने वाले दुर्दानतो को कुत्ते की मौत देते हुए बलिदान हुआ है। अंधेरे का संहार करते प्रकाश का केंद्र बना है, आओ उसका स्वागत करें।

उधर सड़को पर वीर शहादत को नमन करते समुद्र की उफनती लहरों के समान मानुष भीड़ केवल एक कृतज्ञ राष्ट्र के नागरिकों की थी जो जाति, बिरादरी, धर्म, सम्प्रदाय, दल, संगठन, बच्चे बूढ़े, महिला- पुरुष से अलग रूप लिए केवल
भारतवर्ष की संगठित जनता के रूप में थी।
जो अपने हीरो को नमन कर रही थी,
जो इस तारीखी इतिहास बन रहे क्षण में खुद गवाही देने के लिए वहां मौजूद थे।
जो श्रद्धा सुमन दे रहे थे…
भीगी पलकों से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे..

सरकारी अमला भी मौजूद था, सियासत के जाने-माने चेहरे भी नजर आ रहे थे, व्यापारी थे, युवा थे तो विपक्षी दल के लोग भी थे हर कोई तो था और
इन सबके बीच वहां बावर्दी सेना मौजूद थी…
वह सेना जो हिंदुस्तानियों के दिल में बसती है ।
और तिरंगे झंडे के बीच सेना के अधिकारी और जवान जो अपने बीच से एक मासूम सी 22 वर्ष की उम्र में मातृभूमि के लिए अमिट बलिदान देकर बहुत विशाल व्यक्तित्व बन चुके प्रशांत शर्मा कि जांबाजी पर गर्व महसूस कर रहे थे हालांकि दिल में दर्द था…

और वही इन सब के बीच कोरोनावायरस हार चुका था।
लोग एक दूसरे से सटे पड़े थे।
अमर बलिदानी के दर्शन के लिए एक दूसरे को चीर कर आगे बढ़ने के लिए बेताब थे और
कोरोना शायद सोच रहा था कि इन हिंदुस्तानियों का तू क्या बिगाड़ पाएगा।
तू लाइलाज है फिलहाल तेरा कोई इलाज नहीं… तू जान ले रहा है फिर भी यह भीड़ उमड़ी पड़ी है तेरा वजूद नकारते हुए..
अपने उस बलिदानी को अंतिम सफर पर श्रद्धांजलि देने के लिए जिनमें से अधिकांश ने कभी उसे देखा भी नहीं था..

वही हवलदार पद से रिटायर प्रशांत के पिता शीशपाल शर्मा, प्रशांत की मां और बहन को रोते बिलखते देख अपनी आंखों में आए आंसुओ को रोक नही पा रहे थे तो रोते रोते छोटा भाई निशांत शर्मा, बड़े भाई की शहादत देखने के बाद अपने इरादे और पक्के कर रहा था कि कुछ भी हो वह भी भाई की तरह सेना में ही जाएगा।

विकास बालियान
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विनम्र श्रद्धांजलि