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वैक्सीनेशन बच्चों के लिए ही नहीं, बड़ों के लिए भी बेहद जरूरी है

अगर आपको लगता है कि वैक्सीनेशन केवल बच्चों के लिए होता है तो ऐसा सोचकर ही आप अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। एडल्ट्स क लिए भी वैक्सिनेशन जरूरी है। बचपन में भले ही आपको कई वैक्सीन लगी हो, लेकिन बड़े होने पर भी कुछ बीमारियों की वैक्सीन आपको दोबारा लगवानी चाहिए। इसलिए अगर स्वस्थ जीवन जीना है तो फिर से बच्चे बन जाएं और वैक्सीनेशन करवाएं।

खत्म हो जाता है वैक्सीनेशन का असर

– वैक्सीनेशन से बीमारियों के बचाव का एक टाइम पीरियड होता है। वक्त के साथ वैक्सीनेशन का असर यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। वहीं समय के साथ नई बीमारियों के लिए अलग-अलग वैक्सीनेशन आते रहते हैं। उन वैक्सीन को लगवाना भी जरूरी होता है।

– इंडियन मेंडिकल एसोसिएशन के अनुसार 68 परसेंट लोग एडल्ट वैक्सीनेशन के बारे में जानते ही नहीं हैं। नॉन-हेल्दी फूड, नींद की कमी, काम के अनियमित घंटे, तनाव और अक्सर यात्रा करने वाले लोगों में रेसिस्टेंस कम होती जाती है।

इसलिए जरूरी है एडल्ट्स के लिए

– एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 202586 लोग क्रॉनिक हेपेटाइटिस और 60 की उम्र के बाद टेटनस की चपेट में आने से अपनी जान गंवा देते हैं।

– बड़े होने पर अगर वैक्सीनेशन लिया जाता रहे तो कई संक्रमण और गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

– एडल्ट वैक्सीनेशन 19 वर्ष के बाद से दोबारा लेना शुरू कर देना चाहिए।

– कुछ वैक्सीन साल भर में तो कुछ चार या पांच साल में लगवाना चाहिए।

– मौजूदा समय में देश में 20 तरह के एडल्ट वैक्सीनेशन मौजूद हैं।

– इसे कुछ चार या पांच साल में लगवाना चाहिए।

– हाल ही में जीका और ईबोला वायरस के लिए भी वैक्सीन बना ली गई है।

50 से ज्यादा एज ग्रुप के लिए

आईएमए के अनुसार, 50 साल से ज्यादा एज ग्रुप के लोगों को भी वैक्सीनेशन की जरूरत होती है। मौसमी इंफ्यूएंजा फ्लू, न्यूमोकोकल रोग (निमोनिया, सेप्सिस मेनिन्जाइटिस, हेपेटाइटिस बी संक्रमण, टिटनेस, डिप्थीरिया, पेरटुसिस के वैक्सीन जरूर लेने चाहिए।