नगर निगम में नहीं खुल पाया ट्रैक्टर ट्रॉली का टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, सांठगांठ के खेल का ऐसे चला पता

खबरे सुने

देहरादून। नगर निगम में ट्रैक्टर ट्राली के टेंडर में जिस बात का अंदेशा जताया जा रहा था, आखिर हो भी वही रहा है। साठगांठ के खेल में निगम के कुछ अधिकारी अपनी नजदीकी कंपनी को टेंडर दिलाना तो चाह रहे थे, मगर जांच में कोई भी कंपनी मानक पूरे करते नजर ही नहीं आ रही। सूत्रों की मानें तो तीन कंपनी ने पुराना आइटीआर (आयकर रिटर्न) टेंडर में लगाया है, जबकि किसी ने भी मानक के अनुसार पंजीकृत ट्राली के नंबर उपलब्ध नहीं कराए। शर्तों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से अब निगम अधिकारी टेंडर निरस्त करने की तैयारी कर रहे हैं।

हर साल नगर निगम शहर का कूड़ा एक स्थान से कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन तक ले जाने के लिए किराये पर ट्रैक्टर ट्राली लगाता है। पिछले साल 32 ट्रैक्टर ट्राली के टेंडर जारी किए गए थे, जबकि इस बार 35 का टेंडर निकाला गया। पहले इसमें कृषि उपयोग के ट्रैक्टर ट्राली भी उपयोग कर लिए जा रहे थे लेकिन अब परिवहन विभाग ने इस पर रोक लगा दी है। ऐसे में नगर निगम ने इस साल 35 ट्रैक्टर ट्राली के टेंडर में दो नई शर्तें जोड़ दी हैं।

पहली शर्त यह कि सभी ट्रैक्टर ट्राली का व्यावसायिक पंजीकरण होना चाहिए और दूसरी शर्त यह है कि सभी में जीपीएस लगा होना अनिवार्य है। अब तक इसकी बाध्यता नहीं थी। नगर निगम ट्रैक्टर ट्राली के लिए करीब 30 से 35 लाख रुपये का प्रतिमाह भुगतान करता है। गुरुवार को इसके टेंडर डाले गए थे। शुक्रवार को टेंडर खुले तो एक कंपनी बाहर हो गई। बाकी चार कंपनियों के दस्तावेजों व उनकी ओर से दिए ट्रैक्टर ट्राली के नंबरों की जांच चल रही है। टेंडर शुक्रवार को आवंटित हो जाना था, लेकिन यह सोमवार को भी नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि एक कंपनी के दस्तावेजों में कम से कम 200 पेज हैं और हर पेज की बारीकी से जांच चल रही है।

सूत्रों ने बताया कि चार में से तीन कंपनी का आयकर रिटर्न पुराना है, जबकि नियमों के तहत आयकर रिटर्न नवीन होना चाहिए। इसके अतिरिक्त दून की एक कंपनी ऐसी है, जिसके सभी दस्तावेजों में झोल बताया जा रहा है। इस कंपनी का न सिर्फ आयकर रिटर्न पुराना है, बल्कि कंपनी के संचालक ने खुद के पैनकार्ड के बदले किसी और व्यक्ति का पैनकार्ड जमा किया हुआ। सूत्रों के अनुसार इस कंपनी ने सहारनपुर से लिए एक प्रमाण पत्र को जमा किया है, जो टेंडर प्रक्रिया के लिए मान्य ही नहीं है। उत्तरकाशी की जिस कंपनी को सबसे बड़ा बताकर अधिकारियों ने टेंडर उसे ही देने की तैयारी की हुई थी, उक्त कंपनी का आयकर रिटर्न भी पुराना है और दस्तावेज अधूरे।

नगर आयुक्त अभिषेक रूहेला ने बताया कि दस्तावेजों की जांच चल रही है। अगर किसी कंपनी के दस्तावेज में कोई कमी है, तो उसे टेंडर नहीं दिया जाएगा। आयुक्त के अनुसार एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट होगी कि यह कार्य कौन करेगा।

टै्रक्टर पंजीकृत, ट्राली नहीं

टेंडर में कंपनियों ने ट्रैक्टर के पंजीयन नंबर तो उपलब्ध कराए हुए लेकिन ट्राली के नहीं दिए गए। टेंडर के नियमों के तहत ट्रैक्टर व ट्राली दोनों का अलग-अलग व्यावसायिक पंजीकरण होना जरूरी है। ऐसे में कोई भी कंपनी शर्तें पूरी नहीं कर रही।

Leave A Reply

Your email address will not be published.