Home उत्तर प्रदेश मिशन शक्ति के तहत कल मनाया जाएगा- पिंक डे

मिशन शक्ति के तहत कल मनाया जाएगा- पिंक डे

मुजफ्फरनगर। मिशन शक्ति अभियान के तहत 23 अक्टूबर को सभी विभागों में पिक-डे मनाया जाएगा। इसके चलते कार्यालयों में अधिकारी और कर्मचारी गुलाबी रंग परिधान में कामकाज करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं और महिला को सम्मान और सुरक्षा से जोड़ा गया है। नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए जिले में मिशन शक्ति अभियान चल रहा है। इसके तहत आए दिन विभिन्न कार्यक्रम हो रहे हैं। इस अभियान को और धार देने के लिए आगामी 23 अक्टूबर अर्थात शुक्रवार को पिक-डे मनाया जाएगा। इस दिन सभी संस्थानों और कार्यालयों में
तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को गुलाबी रंग का परिधान पहनकर आना होगा। इसके लिए तैयारी हो गई है। कर्मचारियों ने शर्ट के लिए गुलाबी रंग का कपड़ा खरीदना शुरू कर दिया है। कुछ कर्मचारी रेडीमेड शर्ट खरीदने को तरजीह दे रहे हैं। वहीं महिलाएं साड़ी और शूट-सलवार खरीदने की तैयारी कर रही हैं।

डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने बताया कि शुक्रवार को सभी को गुलाबी रंग के परिधान में आने को कहा गया है। मिशन शक्ति के लोगो एवं बैज भी उपलब्ध कराए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील है कि इस अभियान से जुड़ें। जिला प्रोबेशन अधिकारी मो. मुशफेकीन ने बताया कि 23 अक्टूबर यानि शुक्रवार को मिशन शक्ति के तहत पिंक डे मनाया जाएगा जिसमें गुलाबी रंग की ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा। अभियान में शामिल सबी लोगों को मिशन शक्ति के लोगो उपलब्ध कराए जाएगे और बैंड आदि का भी प्रबंध किया जाएगा। उन्होने सभी जनपद वासियों से मिशन शक्ति से जुड़कर अभियान को सफल बनाने की अपील की और नारी सम्मान, सुरक्षा एवं स्वावलंबन को बढ़ावा देने की बात कहीं।

मिशन शक्ति के उद्देश्यः

  • उत्तर प्रदेश में महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों में संलिप्त अधियुक्तों के विरुद्ध मिशन व कार्रवाई।
  • महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा से संबधित कानूनों, पॉक्सो एक्ट, घरेलू हिंसा अधिनियम व महिलाओं संबधित कानूनों व प्रावधानों का प्रचार-प्रसार करना।
  • महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा व अपराधों की रोकथाम, हिंसा के प्रकरण में, दंड के प्रावधानों के संबध में जागरुकता, संबधित हेल्प लाइन नंबर तथा कल्याणकारी योजनाओं व सुविधाओं का प्रचार-प्रसार करना।
  • महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा हेतू प्रदेश के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय तथा कार्यरत अधिकारियों व कर्मियों को महिलाओं तथा बच्चों के मुद्दों के प्रति संवेदित करना।