Home उत्तराखंड नैनीताल जिले के ग्रामीणों की आर्थिकी औषधीय गुणों से परिपूर्ण तिमूर सुधारेगा

नैनीताल जिले के ग्रामीणों की आर्थिकी औषधीय गुणों से परिपूर्ण तिमूर सुधारेगा

नैनीताल : औषधीय गुणों से परिपूर्ण तिमूर अब ग्रामीणों की आर्थिकी संवारने का भी अहम साधन बनेगा। वन विभाग इसका वृहदस्तर पर रोपण कर इसे ग्रामीणों की आय का जरिया बनाने की योजना तैयार कर रहा है। इसके तहत विभाग की नर्सरी में पौध तैयार किए जाएंगे, जिन्हें वन पंचायतों में रोपा जाएगा। इस वर्ष विभाग ने 30 हजार से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद इसके बीज उत्पादन से ग्रामीण आमदनी भी कर पाएंगे।

भूमि संरक्षण वन प्रभाग वन पंचायतों में वन एवं जल संरक्षण के लिए हर वर्ष वृहद पौधारोपण करता है। अब नैनीताल वन प्रभाग पौधारोपण को ग्रामीणों की आमदनी से जोडऩे की योजना बना रहा है। डीएफओ दिनकर तिवारी ने बताया कि इस वर्ष प्रभाग की 339 वन पंचायतों में तिमूर के पौधे लगाने की योजना है, जिसके लिए नर्सरी में पौध तैयार कर ली गई है। इस वर्ष नैनीताल वन प्रभाग की 21868 हेक्टेयर वन पंचायत भूमि पर 30 हजार से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। इन पौधों से बीज का उत्पादन होने के बाद स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इनका विक्रय किया जाएगा। इस योजना को आगे के वर्षों में जारी रखते हुए वन पंचायत भूमि पर तिमूर के क्षेत्रफल में विस्तार किया जाएगा।

औषधीय गुणों से परिपूर्ण है तिमूर

तिमूर का पूरा पेड़ औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। इसकी लकड़ी का दातून पायरिया जैसे रोगों को दूर करने के लिए कारगर है। पत्तियों और छाल का उपयोग कई बीमारियों को दूर करने के लिए औषधि बनाने में प्रयोग किया जाता है। इसके बीज का प्रयोग मसाले, चटनी और चाय में भी प्रयोग किया जाता है।

एक हजार रुपये प्रति किलो है बीज की कीमत

औषधीय गुणों के साथ ही मसालों के रूप में तिमूर के बीजों का प्रयोग होने पर बाजार में भी इसकी खासी डिमांड है। दिनकर तिवारी ने बताया कि इसका प्रयोग टूथपेस्ट बनाने में भी होता है, जिस कारण इसके बीज की कीमत प्रति किलो करीब एक हजार रुपये तक है। वन पंचायत भूमि में इसके बीज के उत्पादन के बाद गठित स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इसे रामनगर विक्रय के लिए भेजा जाएगा।

जंगली जानवरों के आतंक से भी मिलेगी निजात

तिमूर जंगली जानवरों के आतंक से भी निजात दिलाएगा। इसका पेड़ कांटेदार होने के कारण जंगली जीव इसे नुकसान नहीं पहुंचाते। गांव की सीमा से लगे वन पंचायत भूमि पर इसका रोपण कुछ इस तरह किया जाएगा कि गांव की खेतों में प्रवेश करने वाले जंगली जानवरों के लिए एक बाड़ सी तैयार हो जाए, जिससे जंगली जानवर आबादी में आ ही न सकें।