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चमोली जिले की नीती घाटी में टिम्मरसैंण महादेव की यात्रा हफ्तेभर के भीतर शुरू

देहरादून। भारत-चीन सीमा से सटे चमोली जिले की नीती घाटी में टिम्मरसैंण महादेव की यात्रा हफ्तेभर के भीतर शुरू होने के आसार हैं। देश के अंतिम गांव नीती के नजदीक टिम्मरसैंण नामक पहाड़ी पर स्थित गुफा में भी अमरनाथ की तरह बर्फ का शिवलिंग आकार लेता है। इनर लाइन की बंदिशों से मुक्त होने के बाद अब प्रशासन टिम्मरसैंण यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। चमोली जिला प्रशासन के मुताबिक टिम्मरसैंण को जोडऩे वाले मार्ग को बीआरओ ने क्लीयर कर दिया है। अब बांपा में पोस्ट स्थापित कर वहां चिकित्सक व एंबुलेंस की व्यवस्था की जानी है। उधर, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने कहा कि टिम्मरसैंण यात्रा में चमोली जिला प्रशासन को शासन द्वारा पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।

जोशीमठ से करीब 82 किलोमीटर दूर नीती गांव के नजदीक है टिम्मरसैंण महादेव अर्थात बाबा बर्फानी की गुफा। यहां आकार लेने वाले शिवलिंग की ऊंचाई आठ फीट तक होती है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों के लोग इस स्थली से अनभिज्ञ ही थे। हालांकि, स्थानीय निवासी टिम्मरसैंण में पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन इनर लाइन की बंदिशों के कारण दूसरे क्षेत्रों के व्यक्तियों को यहां आने की इजाजत नहीं थी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र होने के कारण इसे इनर लाइन के दायरे में रखा गया था। इस बीच सरकार ने टिम्मरसैंण को धार्मिक व साहसिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के मद्देनजर केंद्र सरकार में दस्तक दी। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष दिसंबर में टिम्मरसैंण महादेव को इनर लाइन से बाहर कर दिया था। यानी अब कोई भी व्यक्ति बाबा बर्फानी के दर्शनार्थ वहां जा सकता है।

इस सफलता के बाद सरकार ने अमरनाथ की तरह टिम्मरसैंण महादेव की यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया। अब इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के मुताबिक बीआरओ ने टिम्मरसैंण को जोड़ने वाले मार्ग से बर्फ हटाने के साथ ही सड़क को दुरुस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि अब यात्रा के मद्देनजर प्रशासन और पर्यटन विभाग की टीम रेकी के लिए टिम्मरसैंण भेजी जाएगी। साथ ही बांपा में पोस्ट की स्थापना और वहां चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ के ठहरने के इंतजाम किए जाने हैं।

जिलाधिकारी भदौरिया ने कहा कि टिम्मरसैंण उच्च हिमालयी क्षेत्र है। इसलिए स्वास्थ्य जांच के बाद ही यात्रियों को टिम्मरसैंण भेजा जाएगा। एक-दो रोज में प्रतिदिन भेजे जाने वाले यात्रियों की संख्या का भी निर्धारण कर दिया जाएगा। प्रयास ये है कि सप्ताहभर के भीतर टिम्मरसैंण यात्रा शुरू करा दी जाए।