श्री नगर मे आतंकियोंं के नापाक हरकतों की भेंट चढ़ गये तीन नागरिक 

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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के हौसले दिन ब दिन बढ़ते जा रहे हैं मात्र दो घंटों के भीतर तीन आंतकी घटना में तीन लोगों की मौत होने से दहशत का माहौल है. पहली घटना श्रीनगर (Srinagar) के इकबाल पार्क के पास हुई जिसमें आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित समुदाय के और बिंदरू मेडिकेट के मालिक माखन लाल बिंदरू पर गोलियां बरसाईं, जिससे उनकी मौत हो गई. वहीं एक अन्‍य घटना, श्रीनगर के बाहरी हिस्‍से हवल में मदीन साहिब के पास हुई, जिसमें आतंकवादियों ने एक स्‍ट्रीट हॉकर की गोली मारकर हत्‍या कर दी.
तीसरी घटना उत्‍तरी कश्‍मीर के बांदीपोरा जिले के हाजिन इलाके में हुई जिसमें अज्ञात बंदूकधारियों ने मोहम्‍मद शफी नामक की गोली मारकर हत्‍या कर दी. इन घटनाओं पर उप राज्‍यपाल मनोज सिन्‍हा

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि श्रीनगर और बांदीपोरा की घटनाओं की सूचना मिलते ही इलाके की घेराबंदी कर दी गई है. मामला दर्ज कर आतंकवादियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को श्रीनगर में आतंकी घटनाओं में नागरिकों को निशाना बनाया गया. इकबाल पार्क के पास आतंकवादियों की गोलियों से घायल हुए दवा व्‍यापारी और कश्‍मीरी पंडित माखन लाल ने अस्‍पताल जाते समय ही दम तोड़ दिया. सूत्रों ने बताया कि गोलियां लगने के कारण बहुत ज्‍यादा खून बह गया था. वहीं, दूसरे हमले में मृत स्‍ट्रीट हॉकर की पहचान बिहार निवासी वीरेंद्र पासवान के रूप में हुई है. तीसरी वारदात बांदीपोरा के हाजिन इलाके में हुई, इसमें गंभीर घायल हुए मोहम्‍मद शफी ने अस्‍पताल ले जाते समय रास्‍ते में ही दम तोड़ दिया.
इन घटनाओं पर उप राज्‍यपाल मनोज सिन्‍हा ने भी शोक जताया है. उन्‍होंने कहा कि मैं कायराना हमले की कड़ी निंदा करता हूं. आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होंगे और ऐसे जघन्य कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा. वहीं पूर्व मुख्‍यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि दुख की इस घड़ी में, मैं परिवार के साथ हूं. यह दुखद खबर है, बिंदरू के परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं. पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मैं हत्‍या की निंदा करती हूं, ऐसी हिंसक घटनाओं का समाज में कोई स्‍थान नहीं है.
गौरतलब है कि माखन लाल बिंदरू को उनकी दुकान पर ही गोलियां मारी गईं. वे जाने माने कारोबारी थे और जम्मू कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद भी यहां से नहीं गए. वे अपनी पत्‍नी के साथ श्रीनगर में रहे और अपनी फार्मेसी बिंदरू मेडिकेट चलाते रहे. हालांकि कश्मीरी पंडित समुदाय के कई लोगों ने 1990 में ही श्रीनगर छोड़ दिया था.

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