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इस सेवानिवृत सैनिक ने नशे के खिलाफ शुरू की जंग, देश सेवा के लिए युवाओं को कर रहे तैयार

उत्तरकाशी। नशे की ओर बढ़ते पहाड़ के युवाओं में बतौर सैनिक देश सेवा का जज्बा पैदा करने व सेना में भर्ती होने के लिए अभ्यास कराने के लिए राजेश सेमवाल की मुहिम रंग लाने लगी है। सेना से सेवानिवृत होने के बाद राजेश सेमवाल ने पुरोला में निश्‍शुल्क भर्ती प्रशिक्षण कैंप शुरू किया है। पुरोला और मोरी के 80 युवाओं को राजेश सेमवाल ने ढाई माह का प्रशिक्षण दिया। ये युवा कोटद्वार में 20 दिसंबर को हुई भर्ती रैली में शामिल हुए। इनमें से 65 युवाओं ने शारीरिक परीक्षा पास की। युवाओं के बेहतरीन प्रदर्शन पर राजेश सेमवाल ने संतोष व्यक्त किया।

सीमांत जनपद उत्तकाशी के पुरोला ब्‍लॉक के सुदूरवर्ती छानिका गांव निवासी राजेश सेमवाल जुलाई माह में गढ़वाल राइफल से सेवानिवृत हुए। गांव लौटे तो सीधे अपने मिशन में जुटे। दरअसल, राजेश सेमवाल ने अपना मिशन सेना में देश सेवा करने के दौरान ही तय कर दिया था। राजेश सेमवाल जब भी छुट्टी लेकर घर आते थे तो गांव के युवाओं को शराब, चरस और स्मैक के नशे में देखते थे। नशे की ओर बढ़ी युवा पीढ़ी को देखकर उन्‍होंने निश्चय कर लिया था कि ‘जब मैं सेवानिवृत होकर घर लौटूंगा तो सबसे पहले नशे के खिलाफ अभियान शुरू करूंगा।’

राजेश ने पहले गांव-गांव में युवाओं को खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए प्रेरित किया। राजेश ने युवाओं के जब बेरोजगारी की हालत में देखा तो उन्होंने युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित किया। युवाओं का हौसला और बढ़ाने के लिए पुरोला में एक निश्‍शुल्क प्रशिक्षण कैंप खोला। जिसमें सुदूरवर्ती मोरी और पुरोला क्षेत्र के 80 युवाओं के खाने, रहने की सुविधा के साथ प्रशिक्षण देना शुरू किया। सुबह से लेकर रात तक शारीरिक प्रशिक्षण और लिखित परीक्षा की तैयारी भी कराई गई।

राजेश सेमवाल का हौसला देखकर नगर पंचायत अध्यक्ष हरिमोहन नेगी और पुरोला विधायक राजकुमार ने युवाओं के पौष्टिक आहर के लिए कुछ आर्थिक सहयोग किया। ये युवा भर्ती के लिए 19 दिसंबर कोटद्वार पहुंचे, जहां गढ़वाल राइफल के भर्ती कैंप में प्रतिभाग किया। इन युवाओं में 65 युवा शारीरिक परीक्षा में पास हुए। राजेश की यह मुहिम युवाओं में भविष्य की नींव तराशने जैसी है।

जितनी बार घर आए उतनी बार व्यथित हुए राजेश 

सेना से सेवानिवृत हुए सैनिक राजेश सेमवाल ने अपने गांव के साथ ही विकास खंड क्षेत्र में नशे के खिलाफ जंग शुरू की हुई है। जिससे स्वास्थ्य, सुरक्षित व सुशिक्षित समाज की स्थापना हो सके। राजेश सेमवाल ने बताया कि वर्ष 2002 में राजकीय इंटर कालेज गुंदियाटगांव से 12वीं करने के बाद वह सेना में भर्ती हुए। लेकिन, अपनी 17 वर्ष के सेवाकाल में जितनी बार भी वह घर आए तो उन्‍होंने अपने घर, गांव और निकटवर्ती बाजार में नशे की ओर जाती युवा पीढ़ी को देखा। इसलिए उसी समय निश्चय किया कि सेवानिवृति के बाद वे गांव में संगठन बनाएंगे। इसकी मुहिम को लेकर उन्होंने युवाओं का संगठन बना दिया है। जिसके जरिये युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राजेश कहते हैं कि पहाड़ के युवाओं में प्रतिभा तो है, लेकिन कुछ कमियों के कारण बेरोजगार हैं, ऐसे युवाओं को रास्ता दिखाने की जरूरत है।