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2022 की जंग होगी आप और भाजपा में, जानिए क्‍या बोले आप प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया

देहरादून: आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के उत्तराखंड दौरे से विपक्षी पार्टियों में खौफ का माहौल है। उन्होंने वर्ष 2022 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा और आप के बीच सीधी जंग बताते हुए कहा कि आगामी चुनाव में कांग्रेस कहीं खड़ी नजर नहीं आ रही है।

प्रेस बयान जारी कर दिनेश मोहनिया ने पार्टी और मनीष सिसोदिया पर कटाक्ष करने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को आड़े हाथों लिया। मोहनिया ने कहा कि जो गलती कांग्रेस की दिवंगत नेता शीला दीक्षित ने दिल्ली में की थी। वही गलती अब उत्तराखंड में प्रीतम सिंह कर रहे हैैं। बकौल मोहनिया, उस दौरान शीला दीक्षित ने भी कहा था कि आप का कोई जनाधर और अस्तित्व नहीं है, लेकिन नतीजा सामने है। उन्होंने कहा कि प्रीतम सिंह कांग्रेस की चिंता करें। वह एक डूबे हुए जहाज के कप्तान हैैं। आम आदमी पार्टी का भविष्य उत्तराखंड की जनता खुद तय करेगी। उन्होंने कहा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की इस तरह की बयानबाजी इशारा करती है कि कांग्रेस को अपना वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा है। उन्होंने मनीष सिसोदिया के दौरे को लेकर कहा कि कुमाऊं में कार्यकत्र्ताओं में काफी जोश देखने को मिला। वही जोश अब गढ़वाल में भी देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी चुनाव लड़ती है तो उसका शीर्ष नेतृत्व अपनी पूर्ण भागीदारी चुनाव में निभाता है।

पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का सिलसिला जारी

आप की नीतियों से प्रभावित होकर हर वर्ग के व्यक्तियों का पार्टी से जुडऩे का सिलसिला जारी है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया के नेतृत्व में नवाब सिद्दीकी, उजाला अंसारी, शायर शौहर जलालाबदी, फिगार साहब समेत 60 व्यक्तियों ने आप का दामन थामा।

कार्यकर्त्‍ताओं को किसान बनाकर रैली निकलवा रही त्रिवेंद्र सरकार: आनंद

आप के प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र आनंद ने बयान जारी कर कहा कि पहले हरिद्वार और फिर ऊधमसिंह नगर में त्रिवेंद्र सरकार ने भाजपा कार्यकत्र्ताओं को किसान बनाकर किसान रैली निकाली। आप प्रवक्ता ने कहा कि पहले तो त्रिवेंद्र सरकार के मंत्री किसानों को खालिस्तानी और उग्रवादी कह रहे हैं। उसके बाद अपने ही कार्यकत्र्ताओं को किसान बनाकर उनसे रैली निकलवाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इससे साफ है कि केंद्र और राज्य सरकार किसान आंदोलन से डरी हुई है और नकाब पहनकर जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है।