Home कविता/शायरी बेहतरीन वर्तमान ही समृद्ध भविष्य की कुंजी है

बेहतरीन वर्तमान ही समृद्ध भविष्य की कुंजी है

राजसत्ता पोस्ट

बेहतरीन वर्तमान ही समृद्ध भविष्य की कुंजी है

बढ़ रहे अनजान सफर के लिए यादों के चिराग़ रास्ता दिखा रहें हैं और खुद अंधेरे में डूबते जा रहे हैं, यादों के किस्से किस्से बनकर रह जाते हैं और ये यादें खुद को ही सीढ़ी बनाकर मुसाफिर को सुनहरे भविष्य की तरफ ढकेलता रहता है ठीक वैसे ही जैसे खुले गगन के नीचे सोने वाला शहर के सड़कों से लेकर लोगों के स्वप्नों के आसियाने तक को सजाने में खुद को खपा देता है,

इन यादों में बहुत ताकत है, अपनापन है, मिठास है, सुकून है, और भय भी है तथा प्रतिशोध भी है, कभी कभी हमें हमारी यादें बेहद भाउक कर देते हैं तो कभी क्रोधित तो कभी बेचैन और कभी कभी गमों या हसीन लम्हों के ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देते हैं जहाँ से पैरों के थकान के बावजूद भी लौटकर आराम करने का मन नहीं होता ठीक वैसे ही जैसे विश्वविद्यालय चौराहा, लल्ला, छात्रावास के बाहर चाय पर दोस्तों के साथ चर्चापरिचर्चा में अतिशय समय व्यतीत करना,

यादों को सीमेट कर अनजान शहर की तरफ निकल पड़ा हूं, एक कंधे पर यादों की दुनिया तो दूसरे कंधे पर भावी भविष्य के वो सारे अरमान जिसे मेरे साथ साथ मेरे चाहने वालों ने भी बुना है, अभी फिलहाल उनके हिस्से सिर्फ खट्टी मीठी यादें ही छोड़कर आया हूं, जो कुछ गुजर जाता है वो बस याद बनकर रहा जाता है, और इन्हीं यादों के कोख से ऐसा वर्तमान जन्मता है जो भावी भविष्य को तय करता है, यादें अगर मीठी हैं, हसीन हैं या फिर सुनहरी हैं तो वर्तमान उत्साहित रहता है और उत्साहित मन से कोमल और सहज़ भविष्य के निर्माण की प्रबलता बढ़ जाती है,,,

यादें बहुत हद तक अतीत है और अतीत सबके हिस्से की ऐसी अनकही पहेली है जिसकी कुंजी वर्तमान है और यह कुंजी जितनी कारगर गढ़ी जायेगी भविष्य के गुत्थियों को सुलझाने में उतनी ही आसानी होगी, तो हमें यादों को सहेजने के लिए विरासत के रूप में एक बेमिशाल, अद्भुत, रोचक, उत्साहित और कर्मप्रधान वर्तमान अतीत के गर्त में ढकेलना होगा ताकि भावी भविष्य बीते यादों पर ऐतबार कर सके, गौरवान्वित हो सके…

सुरेश राय चुन्नी
इलाहाबाद विश्वविद्यालय