ब्राह्मण होने का पावर या कैबिनेट का दम, छात्र नेता से मोदी कैबिनेट तक अजय मिश्रा की यात्रा पर एक नज़र ,

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लखनऊ, 11 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी की दुखद घटना ने सभी को दुखी से ज्यादा चिंतित कर दिया किस तरह रक्षक ही भक्षक बन गये हैं आठ लोगों की निर्मम हत्या के बाद यूपी में पिछले एक सप्ताह से सियासी उबाल देखा जा रहा है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और समूचे विपक्ष के भारी दबाव के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे और मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को पुलिस ने जेल भेज दिया है लेकिन बीजेपी ने अभी तक अपने मंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो चुनावी साल में बीजेपी यह खतरा मोल नहीं ले सकती क्योंकि योगी सरकार पर पहले ही ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगता रहा है। ब्राह्मण समीकरण को साधने के लिए ही जितिन प्रसाद को मंत्री बनाया था। लेकिन विपक्ष अब मोदी सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है कि मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी होनी चाहिए।
देश के गृह राज्य मंत्री और आशीष के पिता अजय मिश्र टेनी लगातार इस बात की सफाई दे रहे हैं कि उनका बेट घटना स्थल पर मौजूद नहीं था। घटना के बाद उन्होंने अमित शाह से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी। शुक्रवार को वह लखनऊ आए थे लेकिन न तो संगठन ने उनको भाव दिया न ही सरकार की आधिकारिक बैठक में उनको बुलाया गया। यानी इस मामले के बाद वो संगठन-सरकार में अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उपर से सुप्रीम कोर्ट के रुख से आने वाले दिनों में अजय मिश्र के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जुलाई में ताजा फेरबदल में अजय मिश्रा को मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया था और वह उत्तर प्रदेश का एकमात्र ब्राह्मण चेहरा हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के कुछ ही हफ्तों बाद, मिश्रा ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों पर चल रहे किसानों के विरोध की सत्यता को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि यह 10-15 किसानों का राजनीतिक शो था। उन्होंने दावा किया था कि वह कुछ ही समय में आंदोलन को समाप्त करने में सक्षम थे। अजय मिश्रा के इस बयान से किसानों में हड़कंप मच गया था और खींचतान शुरू हो गई थी।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के साथ ही उन पर ब्राह्मण विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं। खासतौर से जिस तरह विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ उसके बाद समाज के कुछ खास वर्ग ने योगी सरकार के खिलाफ तेजी से मुहिम चलाया था। आरोप लगाए गए कि इस सरकार में सबसे ज्यादा ब्राह्मणों का ही उत्पीड़न हो रहा है और आए दिन उनकी हत्याएं हो रही हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी तरफ से कई बार सफाई भी दी। अब चुनाव साल में अजय मिश्रा को हटाने का जोखिम बीजेपी नहीं ले सकती क्योंकि उन्हें डर है कि इससे एक बार फिर ब्राह़मणों के भीतर नाराजगी बढ़ सकती है जिसका खामियाजा चुनाव में उठाना पड़ सकता है।
लखीमपुर खीरी कांड में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे के जेल जाने के बाद अब पूरे विपक्ष ने मिश्रा की बर्खास्तगी को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जब तक मिश्रा अपने पद पर बने रहेंगे तब तक उनके बेटे के खिलाफ सही जांच नहीं हो सकती। वो जांच को प्रभावित कर सकते हैं। इसको लेकर सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कार्रवाई की मांग की थी। सोमवार को मिश्रा की बर्खास्तगी को लेकर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी राजभवन के सामने मौन धरने पर बैठने जा रही हैं। यूं कहें कि बीजेपी का इस विवाद से इतनी आसानी से पीछा छूटने वाला नहीं है।
लखीमपुर खीरी में छात्र नेता से मोदी कैबिनेट तक अजय मिश्रा की यात्रा पर नज़र रखने पर, यह पता चलता है कि यूपी के सबसे बड़े जिले के एक ब्राह्मण परिवार से संबंधित, उन्होंने 2009 में एक स्वतंत्र जिला पंचायत सदस्य के रूप में शुरुआत की। कथित तौर पर मिश्रा का अपराधिक इतिहास भी रहा है। स्थानीय भाजपा सूत्रों के अनुसार, मोदी कैबिनेट में जगह मिलने के बाद उन्हें जिले का एक मजबूत नेता माना जाता है।
इससे पहले अजय मिश्रा को 2000 में, उन्हें लखीमपुर खीरी में एक हत्या के मामले में नामित किया गया था और 2004 में उन्हें बरी कर दिया गया था। यह अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है क्योंकि मृतक के परिजनों ने सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। जहां तक ​​अजय मिश्रा के बेटे आशीष की बात है तो उन्होंने 2017 में बीजेपी का टिकट मांगा था लेकिन मना कर दिया गया था। वर्तमान में, आशीष लखीमपुर खीरी में परिवार के स्वामित्व वाली चावल मिल और पेट्रोल पंप की देखभाल करते हैं

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