Home उत्तराखंड खत्म नहीं होगा अशासकीय कॉलेजों का अनुदान, स्पष्ट किया सरकार ने

खत्म नहीं होगा अशासकीय कॉलेजों का अनुदान, स्पष्ट किया सरकार ने

देहरादून। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहायताप्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों और विद्यालयों का अनुदान खत्म नहीं किया जा रहा है। अलबत्ता केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध अशासकीय महाविद्यालयों को राज्य विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने को कहा गया है, ताकि उन पर सरकार का नियंत्रण रह सके।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सदन में नियम-58 के तहत विपक्ष की ओर से उठाए गए मामले के जवाब में यह जानकारी दी। कांग्रेस विधायक मनोज रावत ने मंगलवार को कार्य स्थगन प्रस्ताव में सहायताप्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों और विद्यालयों को अनुदान समाप्त करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक में सहायताप्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों को अनुदान के संबंध में प्रविधान नहीं किया गया है। इससे शिक्षक आंदोलित हैं।

अशासकीय महाविद्यालय अनुदान को यथावत रखने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 500 से अधिक अशासकीय विद्यालयों का अनुदान समाप्त करने की कार्यवाही की जा रही है। सरकार की ओर से जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि अशासकीय महाविद्यालयों व विद्यालयों का अनुदान खत्म नहीं किया जा रहा है। अनुदान प्राप्त करने वाले महाविद्यालयों पर सरकार अपना नियंत्रण चाहती है। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भी सहायताप्राप्त महाविद्यालयों पर सरकार के नियंत्रण का समर्थन किया है।

गन्ना किसानों को पिछले सत्र का शत-प्रतिशत भुगतान

सरकार ने सदन को बताया कि पेराई सत्र 2019-20 में किसानों को गन्ना का बकाया मूल्य शत-प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि राज्य बनने के 20 वर्ष की अवधि में ऐसा पहली बार हुआ है।

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन, फुरकान अहमद व मनोज रावत ने गन्ने के साथ विधानसभा के प्रवेशद्वार पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। शून्यकाल में विधायक काजी निजामुद्दीन ने नियम-58 के तहत गन्ना मूल्य अभी तक तय नहीं किए जाने और किसानों को बकाया भुगतान नहीं करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इकबालपुर मिल पर 175 करोड़ रुपया बकाया है। विपक्ष के सवालों के जवाब में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर सरकार संवेदनशील रही है। बीते पेराई सत्र का पूरा भुगतान किया जा चुका है।