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उदासियां

उदासियों के पत्थर पर
कितने लोग बैठे हैं
अपने अपने दुखों के
सागर के किनारे
कुछ डूब जाते हैं
जब अपनी सोच से लड़ते हुए
वो छोड़ देते हैं जीना
कुछ वही सागर दिल मे लिए
चलते रहते हैं दुनियाँ में
बिना एक बूंद आंखों से छलकाए
और कुछ उदासियों के सागर से
खींच लाते हैं सोचों के भंवर से
नए नज़रिए, लड़ने की ताकत
चलने का हौसला
पर ये उदासियों के पत्थर
कभी खाली नहीं मिलते
मिल ही जाता है कोई न कोई
इन पर बैठा हुआ
अंधेरों में जाने क्या तलाश करता

सिम्मी हसन