मूक-बधिर कर सकेंगे मातृभूमि की वंदना, सांकेतिक भाषा में तैयार हुई संघ की प्रार्थना

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं में जाने वाले मूक-बधिर कार्यकर्ता भी अब सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) में ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ प्रार्थना के माध्यम से मातृभूमि की वंदना कर पाएंगे। प्रार्थना के सांकेतिक रूप को तैयार कर मूक-बधिरों को इसका प्रशिक्षण देने वाली इंदौर की संस्था आनंद सर्विस सोसायटी ने इसे इंटरनेट मीडिया पर वायरल भी कर दिया है, ताकि देशभर में संघ की प्रार्थना को मूक-बधिर सांकेतिक भाषा में समझ सकें।

मूक-बधिरों और सामान्य लोगों के बीच सेतु बनकर उनकी शिक्षा के लिए कई वर्षों से काम करने वाली आनंद सर्विस सोसायटी ने सालभर की कवायद के बाद संघ की प्रार्थना को सांकेतिक भाषा में ढाला है। उन्हें इस रूप में प्रार्थना के शुभारंभ के लिए सरसंघचालक डा. मोहन भागवत के इंदौर आने की प्रतीक्षा थी। यह प्रतीक्षा 22 सितंबर को पूरी हुई और संघ प्रमुख के हाथों प्रार्थना के सांकेतिक रूप का शुभारंभ हुआ।

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