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देश का पहला वैदिक योग व प्रौद्योगिकी स्नातक कोर्स शुरू होगा बीएचयू में

वाराणसी। वेद भारत के आध्यात्मिक चिंतन, मंत्र, श्लोक, साहित्य, संस्कृति या विज्ञान तक सीमित नहीं हैैं, यह प्रौद्योगिकी (टेक्नोलाजी) में भी काफी समृद्ध है। वेद के बाद आए वेदांगों में कल्पसूत्र के चार अंग श्रौतसूत्र, गृह्यसूत्र, धर्मसूत्र और शुल्वसूत्र बताए गए हैं, जो पूरी तरह गणित, विज्ञान व प्रौद्योगिकी के प्रयोगों पर आधारित हैं। इसी को लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में वैदिक योग और वैदिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी में भारत का पहला स्नातक कोर्स शुरू हो रहा है। चार नवंबर को होने वाली एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में वैदिक योग कोर्स को मंजूरी मिल सकती है, जबकि वैदिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के स्नातक व परास्नातक कोर्स को काउंसिल की अगली बैठक तक अनुमति मिलेगी।

धातु विज्ञान, विमान विद्या, नौका शास्त्र और वस्त्र उद्योग पर होगा शोध

वैदिक योग के पाठ्यक्रम के अनुसार प्राचीन ज्ञान-विज्ञान, योग मुद्राओं और प्राच्य खेलों द्वारा होने वाले स्वास्थ्य लाभ का एक अकादमिक आधार तैयार किया जाएगा, वहीं वैदिक प्रौद्योगिकी में मांत्रिक, तांत्रिक और यांत्रिक समेत धातु विज्ञान, विमान विद्या, नौका शास्त्र और वस्त्र उद्योग आदि पर छात्र शोध और अनुसंधान करेंगे। उदाहरण स्वरूप पारे या रसायन से सोना बनाने (कीमियागिरी) की कला हो या सूर्य विज्ञान की विधा या फिर पंचगब्य से उर्वरक, भस्म से जैविक खाद अथवा वनौषधियों से जलशोधन, इन सब प्राच्य विद्याओं पर वैदिक विज्ञान की नई प्रयोगशाला में काम होगा। इसके अलावा इस कोर्स में शामिल वैदिक इंजीनियरिंग व इंस्ट्रूमेंटेशन के तहत टेलीस्कोप, विमान, अणु विज्ञान, नौका समेत तमाम उन वैदिक व पौराणिक यंत्रों पर शोध कर उनकी व्यावहारिकता को स्थापित किया जाएगा।

जलशोधन तकनीक पर हो चुका है पेटेंट

स्नातक कोर्स को काउंसिल की बैैठक में रखने वाले वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रो. उपेंद्र त्रिपाठी के अनुसार वैदिक जलशोधन पद्धति द्वारा बिल्कुल खराब हो चुके पानी को पेयजल में परिवॢतत किया जा सकता है, वह भी शून्य बजट में। इस तकनीक का पेटेंट भी कराया जा चुका है। ऐसी ही अनेक प्रौद्योगिकियां वैदिक काल में रची गईं, जो कि लाखों पांडुलिपियों में आज देश भर के संस्थानों में बंद हैं।

वैदिक योग व खेलों के वैज्ञानिक महत्व की स्थापना

प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि वैदिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी में इतनी शक्ति है कि आधुनिक विज्ञान व तकनीक को राह दिखा सकती है, मगर उनकी खोज हमें करनी होगी। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि वैदिक योग के स्नातक कोर्स में पतंजलि के योग और वेद के बीच के रिक्तिकाल को भरा जाएगा। साथ में वैदिक योग और खेलों के वैज्ञानिक महत्व को आधुनिक चिकित्सा पद्धति व तकनीक की मदद से स्थापित किया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के रक्त में कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ रही है, तो उसे कौन सी यौगिक क्रिया और खेल अपनाना चाहिए, जिससे तत्काल व दीर्घकालिक राहत हो, इस पर भी शोध होगा। प्रो. उपेंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि इन दोनों विधाओं के आने के बाद वेद अध्ययन महज मंत्रों और श्लोकों तक ही सीमित न रहकर मानव जीवन व समाज को बेहतर करने में महती भूमिका निभाएगा।