शिक्षक पति पत्नी ने मिलकर सरकारी स्कूल की कर दी कायापलट, प्राइवेट स्कूल को किया फेल

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Patna: कार्य के प्रति सच्ची लगन और सेवा भाव हो तो कोई भी कार्य सार्थक हो जाता है भविष्य में नाम वही कमाता है जो निस्वार्थ सेवा भाव से अपने कार्य में लीन हो जाता है इसकी सबसे बड़ी मिसाल इन दो पति पत्नी ने दी है
नि:स्वार्थ व सच्ची सेवा, मानवता का सबसे बड़ा धर्म होती है। इसे चरितार्थ कर रहे हैं नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत के किशोरी मुखिया टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक रंजय कुमार राजन और उनकी शिक्षक पत्नी जुली कुमारी।
शिक्षक चाह ले तो स्कूल का माहौल बदल सकता है। ऐसा ही कुछ प्रयास किया भवानीपुर के किशोरी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय के विज्ञान से स्नातक किये प्रधानाध्यापक रंजय कुमार राजन और हिंदी से स्नातक उनकी पत्नी जुली कुमारी कुमारी कर रहे हैं। दोनों ने मिलकर स्कूल की तस्वीर ही बदल दी।
स्कूल और शिक्षा व्यवस्थाओं सुधारने के जुनून के साथ इन्होने सरकारी स्कूल का कायाकल्प ही कर दिया। नरपतगंज के भवानीपुर के किशोरी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय सुरसर नदी से मात्र एक सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिनके कारण बाढ़ की समस्या से काफी परेशानी होती है। उसके बावजूद शिक्षक पति-पत्नी ने स्कूल में कई बदलाव किए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर उनके ये बदलाव अब मिसाल बन गए हैं। पति-पत्नी स्कूल में शिक्षक के अभाव के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की जिंदगी सवार रहे हैं।
जरूरतमंद छात्रों को पुस्तक, कापी-कलम भी बिल्कुल मुफ्त मुहैया करवाते हैं। शिक्षक पति पत्नी नरपतगंज में एक किराए के मकान में रहते हैं और वहां कुछ छात्रों को अलग से भी पढ़ाते हैं। वो घर पर भी मुफ्त में क्लास लेते हैं। मृत्यु भोज बहिष्कार का अभियान भी चलाने वाले शिक्षक रंजय कुमार रंजन बताते हैं कि उनके पिता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित थे और उसने मृत्यु से पहले कहा था कि मेरे मरने के बाद मृत्यु भोज नहीं करना।
शिक्षक रंजय कुमार राजन अपने पिता के पुण्यतिथि पर गरीब छात्रों के बीच हर साल कापी-कलम और किताब बाटते हैं। वे समाज से मृत्यु भोज का बहिष्कार करने के लिए अभियान चला रहे है और ग्रामीणों को मृत्यु भोज बहिष्कार करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना हैं किसी के मृत्यु पर भोज क्यों? उनका कहना हैं कि किसी का जवान बेटा मर जाता हैं तब पर भी एक बुजुर्ग लाचार बाप को भोज करना पड़ता हैं। मां बाप रो रहे हैं ऐसे में लोग उनके दरवाजे पर हंसी-खुशी से रसगुल्ले का स्वाद ले रहे होते हैं।
सरकारी स्कूल के शिक्षक रंजय कुमार रंजन प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अपने सरकारी स्कूल में भी पेरेंट्स मीटिंग करते हैं, जहां अभिभावकों से छात्रों के बारे में बताया जाता हैं। उनकी परेशानी सुनते हैं और साथ ही ग्रामीण अभिभावकों को जागरूक भी करते हैं ताकि अभिभावक भी बच्चे की शिक्षा में अहम भूमिका निभा सकें।
शिक्षक रंजय खुद भी पौधारोपण करते हैं और छात्रों को भी पौधरोपण करने के लिए प्रेरित करते हैं। अपने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक रंजय और उनके छात्रों ने मिलकर सेकड़ों पौधें लगाए हैं। स्कूल में अनेक प्रकार के फूल लगे हैं जोकि स्कूल की सुंदरता बनाये हुए हैं।

शिक्षक के साथ साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं रंजय शिक्षक रंजय कुमार रंजन एक शिक्षक के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। वह हमेशा सामाजिक कार्य में जुड़े रहते हैं। कोराना के दौर में भी गरीब बस्ती मास्क, साबुन आदि का वितरण किया। वही ठंड के समय गरीब,लाचार व्यक्तियों के कंबल आदि का वितरण करते रहते हैं। गरीब,लाचार व्यक्ति की बेटी की शादी में भी कुछ आर्थिक मदद करते हैं। वे प्राथमिक विद्यालय में चारदीवारी नहीं रहने और स्कूल में शिक्षक के अभाव के कारण दु:खी हैं। उसने खुद के पैसा से स्कूल की चारदीवारी बांस से बनायी हुई है। विद्यालय के चहारदीवारी के लिए उन्होंने अररिया जिलाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भी लिखा है।

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