Browsing Tag

हुई

छोटी हुई दुशाला

बिखरे बिखरे मन के सीपी बिखरी मन की माला है. कैसे समेटू पीड़ाओं को छोटी हुई दुशाला है.. व्याकुलता पल पल बढ़ती है कटु वेदना मानस पर. ठोकर लगी है इन घाँवों को फूटा अभी ये छाला है.. बिखरे बिखरे... रात घनी है पथ में काँटें चलना पर मजबूरी…