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व्यवस्था फेल या व्यवस्था एक्सपोज

राजसत्ता पोस्ट

व्यवस्था फेल या व्यवस्था एक्सपोज

आम दिनों में अगर किसी को हल्का बुखार या कोई स्वास्थ की दिक्कत हो तो हम हमेशा प्राइवेट डॉक्टर्स का ही रुख करते है, क्योंकि हमें तो सरकारी व्यवस्था पर भरोसा है ही नही।
हा हम सरकारी डॉक्टर को प्राइवेट में दिखा कर खुश होते है।

सबसे पहले तो जान लीजिए , कोई सरकार व्यवस्था तो बना सकती है पर उसे सुचारू रूप से चलाने में आपके ही प्रयास की जरूरत है।
ऐसा नही है आप स्थिति नही समझते है पर जानबूझकर व्यवस्था को दोष दे देना ही हमारा स्वभाव है।

मांग और आपूर्ति के अंतर से व्यवस्था कोलेप्स हो ही जाएगी , ये भी तय है।

बिना गम्भीरता के हॉस्पिटल में जाना , दोष देना ।
उन गम्भीर लोगो के इलाज के अधिकार को छीनने जैसा है जो रिकवर हो सकते है।
जितना सम्भव हो व्यवस्था को दोष देने से बेहतर व्यवस्था बनवाने में सहयोग करे।

  • विजित त्यागी राजसत्ता पोस्ट