Home धार्मिक वैदिक जीवन पद्धति ही संस्कार जीवित रख सकती है: आचार्य अजय मिश्रा

वैदिक जीवन पद्धति ही संस्कार जीवित रख सकती है: आचार्य अजय मिश्रा

सेवा अहर्निश फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य अजय नारायण अपने जोधपुर प्रवास में आज शहर में युवाओ के साथ संवाद में बताया कि पूर्व काल मे जब हमारा देश सारे संसार में विश्वगुरु के परम सम्मानित पद पर प्रतिष्ठित होकर सारे संसार को नैतिक सामाजिक पारिवारिक जीवन शैली के सर्वोत्तम विधि से परिचित कराके शोभायमान हो रहा था तब इसके मूल में हमारी सनातनी वेद विहित शिक्षा संस्कार ओर संस्कृति ही थी जिनका कालांतर में देश पर होने वाले विभिन्न विदेशी आक्रांताओं के द्वारा सतत विनाश किया गया।

आचार्य अजय, सोर्स (राजसत्ता पोस्ट)

उन्होंने कहा कि आर्थिक से अधिक हमारे सांस्कृतिक विनाश को लक्ष्य किया जिसमें अधिकतम अंग्रेजी शासन में हुआ।
एक घनघोर षटयन्त्र के द्वारा अंग्रेजों ने हमारी सनातन परंपरा को अवमूलन करके अपनी अतार्किक अनुचित अनावश्यक परम्परा का महिमा मंडन करके देश मे यह व्याप्त कर दिया कि सनातन परंपरा पिछड़ेपन की पहचान है तथा अंग्रेजी की अनावश्यक और केवल दिखावटी – बनावटी परम्परा बड़ी आधुनिक है, जबकि आदिकाल से लेकर आजतक यह सर्वसिद्ध है कि हमारे जैसी वैज्ञानिक, तार्किक और कल्याणकारी संस्कृति न थी, न है और न होगी। इस अवसर पर शास्त्री बजरंग पारीक ने सीमावर्ती इलाके में आगामी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सबका धन्यवाद किया। इस अवसर पर एडवोकेट रविन्द्र सिंह खुड़ियाला, भाजपा नेता गजेंद्रसिंह देणोक, प्रवीण जैन, नरेश सिंह, शक्तिसिंह (छात्रनेता), जीवन सिंह, भगवान सिंह, मदन सिंह साथ ही गड़ा शहर के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

लेखक: बजरंग पारीक