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केंद्र सरकार का पंजाब में किसानों से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजना एक बड़ा कदम है- अशोक बालियान

राजसत्ता पोस्ट

केंद्र सरकार का पंजाब में किसानों से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजना एक बड़ा कदम है- अशोक बालियान, पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन
केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीद की तैयारियों के बीच साफ कर दिया था कि पंजाब में गेहूं की एमएसपी का पूरा पैसा सीधे किसानों के खातों में सरकार द्वारा भेजा जाएगा। इस व्यवस्था को पंजाब पिछले कई वर्षों से अपने यहां लागू नहीं कर रहा था, लेकिन इस बार खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में जा रहा है। पिछले खरीद सत्र तक पंजाब में किसानों को एमएसपी का भुगतान आढ़तियों के जरिये किया जाता था।
केंद्र सरकार का कहना है न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में हस्तांतरित (डीबीटी) प्रणाली पारदर्शिता लाने के साथ अवैध रूप से बाहर से आने वाले गेहूं व् धान को रोकने के लिए भी हैं। पिछले धान के सीजन में पंजाब में यूपी और बिहार समेत कई राज्यों से आए कई ट्रक धान पकड़ा गया था जो वहां औने-पौने दाम में खरीदकर पंजाब की मंडियों में एमएसपी पर बेचा जा रहा था।
पंजाब का किसान काफी हद तक आढ़तियों पर निर्भर है। वे साल भर किसानों को पैसे देते हैं। किसान की फसल तो साल में दो बार आती है। ऐसे में जब पैसे का ट्रांजेक्शन आढ़तियों के जरिए होता है तो वह किसान को जो एडवांस और ऋण देता है वो उनकी अदायगी मय ब्कक के यर लेता है। इस व्यवस्था में किसानों का शोषण होता था। क्योकि आढ़ती किसान से मय ब्याज के अपनी रकम काट लेता था। और किसान को आढ़ती से फिर से ऋण लेना पड़ता था।
ग्रामीण पंजाब में किसानों और खेतीहर मज़दूरों के बीच ऋणग्रस्तता पर एक अध्ययन में कहा गया है कि 86 प्रतिशत किसान और 80 प्रतिशत खेतीहर मज़दूर क़र्ज़ में डूबे हुए हैं। वर्ष 2010 के एक समिति ने सिफारिश की थी कि यह प्रणाली, जिसमें किसानों के उत्पादन का भुगतान कमीशन एजेंटों के माध्यम से किया जाता है, को हटा दिया जाना चाहिए। और किसानों को उनके उत्पादन की ख़रीद के लिए प्रत्यक्ष भुगतान किया जाये।
पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन यह मांग काफी वर्षों से कर रही थी कि देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी को लेकर भुगतान की कई राज्यों में अलग-अलग व्यवस्थाएं रही हैं। लेकिन ज्यादातर राज्यों में किसानों को एमएसपी पर खरीद का पैसा सीधे खातों में भुगतान होता है। लेकिन पंजाब में भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार आढ़तियों को भुगतान करते हैं। और आढ़तिया किसानों को पैसा ट्रांसफर करते हैं, जो किसान हित में नही है। इसलिए किसानों को उनके उत्पादन की ख़रीद के लिए प्रत्यक्ष भुगतान किया जाये।
दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में किसानों के अलावा पंजाब और हरियाणा के आढ़ती भी बड़े पैमाने पर शामिल रहे हैं और किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे इन आढ़तियों पर पंजाब में किसान आंदोलन को फंडिंग देने के आरोप भी लगे है। इस आढ़तियों के अलावा किसान आंदोलन के समर्थन में कई देशों में पैसा इकट्ठा किया गया है और इसीलिए सवाल उठ रहे है कि पंजाब से उठे किसान आंदोलन के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है। केंद्र सरकार के पंजाब में गेहूं की खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजने से अब किसान आन्दोलन से आढ़तियों की रूचि कम हो रही है।
केंद्र सरकार का पंजाब में किसानों से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली खरीद का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में हस्तांतरित (डीबीटी) करना किसान हित का एक सराहनीय व् बड़ा कदम है।