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हिन्दुस्तान के ताज कश्मीर की नयी इबारत लिखने के राह पर पूर्वांचल के भूपुत्र मनोज सिन्हा

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राजसत्ता पोस्ट

 

हिन्दुस्तान के ताज कश्मीर की नयी इबारत लिखने के राह पर पूर्वांचल के भूपुत्र मनोज सिन्हा

हिन्दुस्तान के ताज जम्मूकश्मीर के प्राचीर से जब आदरणीय श्री मनोज सिन्हा जी तिरंगा फहराकर भारत माता की जय का उद्घोष करेंगे तो सचमुच वह गाज़ीपुर-पूर्वांचल के लिये गौरव का क्षण होगा।

जब विकासपुरुष विकास के चहुंमुखी आयाम को अपने विजन से दिन रात एक करके सींच रहे थे, जेठ हो या बर्फीली रात गाज़ीपुर के बंजर माटी को सींचकर विकास के गुलशन उगाने में उद्दत मनोज सिन्हा जी को जब चुनाव के वक़्त कड़ाके की गर्मी में बारह बजे रात तक पसीनों में नहाये थकान के साथ बोलते बोलते सूखे गर्दन से पानी पी पी कर जबरन बोलते देखता था तो मन में टीस उठती थी, अनायास यह सवाल ज़ेहन में प्रस्फुटित हो उठता था कि गजब हाल है जो विकास स्वयं जोर जोर से चीख कर गाज़ीपुर में हो रहे विकास की गवाही दे रहा है उसके लिये गला फाड़ फाड़कर चीख चीख कर नेता जी को बताना पड़ रहा है, क्या गाज़ीपुर की जनता इतनी अनजान है विकास कार्यों से? क्या यहां के लोक के लिये विकास के कोई और मानक हैं या फिर आँखों पर किसी और प्रकार के चश्में लग गये हैं….हालांकि जो हुआ वह नियति मानकर जबरन ख़ुद को आश्वस्त कर लेने में ही समझदारी है!

उनके हारने के कई कारण बताये गये पर बौद्धिकता के आधार पर किसी भी आरोप को तर्क के कसौटी पर खरे उतरते नहीं पाया मैने!

हालांकि नेता जी जीत हार से बहुत ऊपर के सफ़र पर निकल पड़े थे, जैसे गांधी जी…वह परिणाम के बारे में नहीं कर्म के बारे में सोचते रहे उसी तरह नेता जी भी निकल पड़े थे अपने विचारधारा के साथ यद्यपि राह में क्षणिक जीत हार, अपेक्षा-उपेक्षा के साथ आगे बढ़ते रहे पर यह उनके धैर्य की ताकत थी,आत्मविश्वास का प्रतिफल था कि वो चले तो चलते ही गये कभी पीछे मुड़कर नहीं देखे शायद इसीलिए बेदाग व्यक्तित्व के असाधारण व्यक्ति आदरणीय नेता जी राष्ट्र के पटल पर छा गये, देश के लोक सभा चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय अगर कु़छ रहा तो वह था नेता जी का चुनाव हार जाना, देश शोकाकुल था गाज़ीपुर को लोग पानी पी पीकर कहते हुए गालिया रहे थे कि वहाँ के लोग एक हीरा को पहचान नहीं पाये वहाँ के लोग विकास के बारे में अनभिज्ञ हैं! तमाम बातें।

पर इस देश ने सदैव से योग्यता को सम्मान दिया है पर हां गाज़ीपुर ने उचित समय से अपने माटी के लाल को ना पहचानकर एक ऐसी भारी गलती कर दी शायद जिसका कोई प्रायश्चित नहीं! यह अतीत के पन्नों में एक काले धब्बे में सिर्फ लीपा पोती ही समझ आएगा, बहरहाल देश के शीर्ष नेतृत्व को आदरणीय मनोज सिन्हा के तेज़, पराक्रम, सादगी, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सही को सही कहने का साहस, अन्याय को एक सिरे से खारिज करने की बेबाक क्षमता पर पूर्ण विश्वास था, और उस तरह के वो तथाकथित लोग जो नेता जी के करियर की परवाह करते हैं या उनसे ईर्ष्या भाव रखते हैं उनके लिये महाकवि रामधारी सिंह दिनकर के रश्मिरथी से चार लाइन लेकर आया हूँ जिसे सुनिए और निर्थक प्रयास की तिलांजलि देते हुए निःस्वार्थ सोचना शुरू करिए कि….

” तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतलाके,
पाते हैं जग से प्रशस्ति अपना करतब दिखलाके|
हीन मूल की ओर देख जग गलत कहे या ठीक,
वीर खींचकर ही रहते हैं इतिहासों में लीक”

जिसका दिल जितना बड़ा होता है वह उतना ही सम्मान का अधिकारी भी होता है! बस राष्ट्रीय फलक पर गाज़ीपुर के बगिया से निकला यह फूल समूचे देश को अपने सुगंध से मंत्रमुग्ध करता रहे महादेव से यही कामना है…और हमें यह पूरा यक़ीन है कि एकदिन जम्मूकश्मीर का हृदय परिवर्तन होगा और वह राष्ट्र के मुख्यधारा में जुड़ेगा और नेता जी के विज़न से चहुंमुखी विकास करेगा….

लेखक – सुरेश राय चुन्नी (गाजीपुर)