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विश्वभर में हिन्दीध्वजा लहराने हेतु लिया संकल्प

 

राजसत्ता पोस्ट

उत्तराखंड/देहरादून

🌸हिन्दी साहित्य भारती, उत्तराखण्ड🌸

विश्वभर में हिन्दीध्वजा लहराने हेतु लिया संकल्प
हिन्दी साहित्य भारती ने अल्प समय में ही वैश्विक मानचित्र पर अपनी पहचान बनाते हुए विश्व के लगभग 27 देशों और भारतवर्ष के 22 प्रदेशों में अपनी इकाईयों का गठन कर दिया है।
संगठन की गतिविधियों के विस्तार को दृष्टिगत रखते हुए उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक बृहस्पतिवार, 27 अगस्त, 2020 को सम्पन्न हुई।
यह बैठक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, केंद्रीय महामन्त्री तथा उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल शर्मा की उपस्थिति तथा प्रदेश महामंत्री डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ के संचालन में सम्पन्न हुई।
गोष्ठी का शुभारंभ बीना जोशी द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वंदना से हुआ तदुपरांत हिन्दी साहित्य भारती के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रविन्द्र शुक्ला द्वारा लिखित मातृ वंदना डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ द्वारा प्रस्तुत की गई।


बैठक में हिंदी साहित्य भारती की उत्तराखंड कार्यकारिणी द्वारा की गई गत कार्यवाही की पुष्टि प्रदेश कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों के परिचय, जनपदों की कार्यकारिणियों के विस्तार पर चर्चा, केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुरूप अपनी विचारधारा और अपने संगठन से जुड़े समीक्षकों/समालोचकों, अनुवादकों , शोध निर्देशकों और मंचीय कवियों की सूची तैयार करने तथा अन्य विषयों पर चर्चा हुई।
केंद्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि हिन्दी साहित्य भारती से ख्यातिलब्ध शिक्षाविद, भाषाविद और श्रेष्ठ साहित्यकार जुड़ रहे हैं। अनेक कुलाधिपति, कुलपति, उपकुलपति, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक और प्रसिद्ध साहित्यकार हिन्दी साहित्य भारती के दायित्ववान कार्यकर्ता के रूप में सक्रियता से काम कर रहे हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य भारती के विविध लक्ष्यों के रूप में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने तथा उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक इससे जन-जन को जोड़ने और धरातल पर कार्य करने आवश्यकता पर भी बल दिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने आशा व्यक्त की कि हिन्दी साहित्य भारती,उत्तराखंड की प्रदेश इकाई केंद्रीय नेतृत्व के दिशानिर्देशों के अनुरूप काम करते हुए श्रेष्ठ प्रदेश इकाई सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि आजादी के 73 वर्षों में हिन्दी को वह सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसकी वह अधिकारिणी है। डॉ. मिश्र ने कहा कि उत्तराखंड की टीम में एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली एवं योग्य कार्यकर्ता हैं, जो संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सुनियोजित तरीके से उत्कृष्ट कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि हम स्वयं से प्रारम्भ करे और कृतसंकल्प होकर कार्य करे तो कुछ भी असंभव नहीं। हिंदी का परचम हिंदी साहित्य भारती पूरे विश्व में फहराएगी। साथ ही उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, जिलाध्यक्षों एवं जिला महामंत्रियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की।
बैठक में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा कार्यकर्ताओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। बैठक में उपरोक्त के अलावा प्रदेश उपाध्यक्षों में डॉ. लालिमा वर्मा, डॉ. आलोक मिश्र, डॉ. आशा शैली, डॉ. बी. डी. कांडपाल, प्रदेश संयुक्त महामन्त्री मीनू जोशी, प्रदेश कोषाध्यक्ष सचिन प्रधान, प्रदेश मीडिया संयोजक ठाकुर मोहित सिंह, प्रदेश मंत्रियों में बसंती मठपाल, बीना जोशी, डॉ. अर्पणा रावत, राम शंकर सिंह, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यों में नीना अग्रवाल, डॉ. प्रभा पन्त, डॉ. देव सिंह पोखरिया, विभा पांडे तिवारी, प्रदीप भार्गव, डॉ. जी. एल. भट्ट, जिलाध्यक्षों में प्रबोध चंद्र उनियाल, अरुण शर्मा, दिनेश चंद्र पाठक, नंदन सिंह राणा, भगत सिंह राणा, राजेश जोशी, गणेश चंद्र सिंह रावत, नीरज पंत, डॉ. जितेंद्र राय, जिला महामंत्रियों में डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, अलका शर्मा, रोशन बलूनी, साधना जोशी, डॉ. अनुपम शुक्ला, मोती प्रसाद साहू, संजय कुमार भारद्वाज, आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी वरिष्ठ साहित्यकारों तथा पदाधिकारियों ने एक स्वर में हिन्दी साहित्य भारती के पावन उद्देश्य को पूर्ण करने की प्रतिबद्धता प्रकट की।
अंत में प्रदेश महामंत्री डॉ. कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’ ने सभी का आभार व्यक्त किया।

आशीष त्यागी (देहरादून)