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पढ़िए देश के Most successful ट्रांसजेंडर्स के संघर्षो की कहानी

समाज मे हिस्सा और जगह दोनों तलाशती एक उम्मीद

समाज बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है लेकिन बहुत – सी चीजों में समाज और परिवार रोड़ा बनकर सामने आ जाता है। ऐसे बहुत लोग हैं जो समाज और परिवार से उपेक्षित होते हुए भी हार नहीं मानते हैं,अपनी क्षमता बढ़ाते और समाज में अपनी नई पहचान बनाते हैं ।

हमारे देश में 20 लाख लोग ऐसे हैं जो आज भी समाज और परिवार द्वारा लिंग के आधार पर उपेक्षित है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो परिवार और समाज को अंगूठा दिखाकर अपनी पहचान की खोज में निकल जाते हैं और एक दिन समाज के सामने आदर्श बनकर आते हैं।

यहां हम बात कर रहें #ट्रांसजेंडर समाज की जिनकी 20 लाख आबादी के अधिकतम लोगों को परिवार द्वारा उपेक्षित होने पर दर- दर भटकना पड़ता है। लेकिन हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जो समाजिक बेड़ियों को तोड़ अपनी पहचान स्थापित करके हमारे बीच आदर्श बन चुके हैं।

1. पद्मिनी प्रकाश

पद्मिनी प्रकाश को देश की पहली महिला ट्रांसजेंडर न्यूज एंकर बनने का गौरव मिला है। उन्होंने 2014 में #कोयंबटूर में स्थित एक तमिल न्यूज़ चैनल में बतौर न्यूज़ एंकर काम करना शुरू किया।

पद्मिनी के घरवालों को जब उनके ट्रांसजेंडर होने का पता लगा तो उनपर बहुत – सी पाबंदियां लगा दी गई। पद्मिनी प्रकाश के लिए ये सब बिल्कुल भी आसान नहीं था। अपने घरवालों के रवैये से परेशान होकर 13 वर्ष की उम्र में घर से भाग गयी और आत्महत्या करने की कोशिश की। आत्महत्या से बचने के बाद पद्मिनी एक अलग जज़्बा से अपनी जिंदगी की शुरुआत की। डिस्टेंस लर्निंग से बीकॉम में अडमिशन लिया लेकिन आर्थिक तंगी के कारण दो साल में ही पढाई छोड़नी पड़ी।
साल 2004 में आपरेशन करवाकर पद्मिनी प्रकाश महिला बन गई। इसी साल पद्मिनी ने नागराज प्रकाश से शादी की और दोनों ने एक बेटे को गोद लिया। #पद्मिनीप्रकाश क्लासिकल डांसर भी हैं। उन्होंने भरतनाट्यम सीखा है और दूसरों को भी सिखाती हैं । साथ – साथ वो एक कुशल अभिनेत्री भी हैं, कई तमिल टीवी सीरियलों में काम कर चुकी हैं। साल 2007 में मिस ट्रांसजेंडर तमिलनाडु और साल 2009 में मिस ट्रांसजेंडर इंडिया बनीं।
#पद्मिनी की हौसला से कई लोगों को प्रेरणा मिली है। पद्मिनी थर्ड जेंडर के कल्याण के लिए काम करती हैं, लोगों को जागरूक करने का काम करती हैं।

2.पृथिका याशिनी

#पृथिकायाशिनी हमारे देश की पहली महिला ट्रांसजेंडर सब- इंस्पेक्टर हैं। #तमिलनाडु की रहनेवाली पृथिका के पिता कैब ड्राइवर थे और मां सिलाई का काम करती थी। प्रदीप कुमार के रूप में जन्मी पृथिका जब अपने माता-पिता को लिंग परिवर्तन करवाने की बात कही तो उनके घरवाले चौक गए। उन्हें रोकने के लिए दवाई से लेकर तंत्र मंत्र तक करवाया, लेकिन पृथिका के सामने कोई रोड़ा टिक नहीं पाया। पृथिका उसके बाद चेन्नई में ट्रांसजेंडर समाज से मिली और फिर उनके ही मदद से प्रदीप से पृथिका बनीं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए पृथिका को कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी। तमिलनाडु यूनिफॉम्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड एग्जाम पास करके पृथिका यहां तक पहुंची हैं, लेकिन पृथिका का नाम सर्टिफिकेट में प्रदीप कुमार था जो वर्तमान नाम से मैच नहीं कर रहा था। बोर्ड पृथिका को परीक्षा में बैठने नहीं दिया तो पृथिका को कानूनी जंग जीतना पड़ा फिर लिखित परीक्षा दे पायी। कोर्ट से जीतने, पुलिस में चयन होने और सफल ट्रेनिंग के बाद पृथिका कहती हैं कि वह अपने जैसे लोगों के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं।

3.जोयिता मंडल

#जोयितामंडल देश की पहली ट्रांसजेंडर जज हैं। उन्हें #पश्चिमबंगाल के इस्लामपुर की लोक अदालत में जज नियुक्त किया गया है। बचपन से ही जोयिता को भेदभाव का सामना करना पड़ा। जब वह छोटी थी तो उन्हें हर बात पर घरवालों से डांट सुनने को मिलता और स्कूल में ताने सुनने को मिलता। इन सभी चीजों से तंग आकर उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और फिर घर छोड़ा।
कॉल सेंटर में काम किया लेकिन वहां पर लोग मजाक उड़ाया करते थे, परेशान होकर जोयिता को नौकरी भी छोड़नी पड़ी।
घर छोड़ने और फिर नौकरी छोड़ने के बाद जोयिता के लिए हर दिन काटना लोहे के चने चबाने जैसा था। उनके पास सर ढकने के लिए छत नहीं थी। कोई भी उन्हें किराये पर कमरा देने के लिए तैयार नहीं होता था। ऐसे में सर्दी हो या गर्मी उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ती। पैसों की कमी के चलते उन्होंने कई बार भीख मांगकर भी गुजारा किया।

भीख मांगने से लेकर किसी लोक अदालत की जज बनना ये ट्रांसजेंडर जोयिता मंडल ने इसी जिंदगी में देखा है। आज जोयिता की जिंदगी किसी मिसाल से कम नहीं है। उन्होंने ये साबित कर दिया कि कुछ अलग और बेहतर करने के लिए सच्ची मेहनत और दृढ़ संकल्प की जरूरत है।

4. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर #लक्ष्मीनारायणत्रिपाठी किन्नर समुदाय के लिए एक क्रांति लेकर आयी। #मुंबई में जन्मी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी बेहद ही स्टाइलिश और फैशनेबल हैं। वो बताती हैं कि उनको बचपन में कई बार सेकस्वली अब्यूज किया गया। कई टीवी शोज में काम कर चुकी लक्ष्मी बिग बॉस 5 की हिस्सा भी रह चुकी हैं। #कुंभ2019 के दौरान #किन्नरअखाड़ा आकर्षण का केंद्र था, रोज़ हजारों लोग वहां पहुंचते थे। #कुंभ में पेशवाई के समय किन्नर अखाड़ा द्वारा नेतृत्व किया गया, जिसमें लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ऊंट पर सवार होकर निकली। #लक्ष्मीनारायणत्रिपाठी थर्ड जेंडर के कल्याण के लिए काम करती हैं और उनकी किताब “मी हिजड़ा, मी लक्ष्मी ” बेहद चर्चा में रही थी। उन्होंने ये भी कहा था कि उनका परिवार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। परिवार के प्रेम के कारण ही वे आज जिंदगी के हर मोड़ पर संघर्ष कर आगे बढ़ती आई हैं।लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को साल 2016 में किन्नर अखाड़ा का प्रमुख बनाया गया था तबसे वो निरंतर उस पद पर बनी हुई हैं।

5. निताषा बिस्वास

निताषा बिस्वास 2017 में देश की पहली ट्रांसजेंडर ब्यूटी क्वीन बनीं। निताषा अपने परिवार के ख़िलाफ़ जाकर अपने अंदर की औरत को पहचान दिलाई। निताषा जब तीन साल की थी तभी उन्हें एहसास हुआ कि वो लड़की हैं जबकि उनका शरीर लड़के का था। बिजनेस मैनेजमेंट की पढाई करने वाली निताषा घरवालों के विरोध के बावजूद यौन सर्जरी करवाने दिल्ली आ गई और यहां निताषा को तीन से चार साल सर्जरी करवाने में लग गये। निताषा को ब्यूटी कांटेस्ट में बहुत रुचि थी उन्होंने इसमें हिस्सा लिया और उन्हें देश की पहली ट्रांसजेंडर ब्यूटी क्वीन बनने का गौरव मिला।

लेखिका – खुशबू झा