Home स्पेशल स्त्री विमर्श का उपन्यास “स्मैक “ पर राघवेंद्र की समीक्षा

स्त्री विमर्श का उपन्यास “स्मैक “ पर राघवेंद्र की समीक्षा

स्त्री विमर्श की सशक्त लेखिका Bhumika Dwivedi जी ने इस उपन्यास में महानगरीय जीवन के चमक-दमक के पीछे अंधकार से सराबोर जीवन को दिखाने के साथ-साथ बिना अभिभावक के लड़की का संघर्ष कई गुणा बढ़ जाता है,प्रभावी ढंग से दिखाया है।उपन्यास “स्मैक” की कहानी मुम्बई एयरपोर्ट पर रोती-बिलखती रूबी ख़ानम की कहानी है,जो लेखिका को वही एयरपोर्ट पार फ़्लाइट छूटने के दौरान मिलीं थी।मुम्बई में जीवन के कई स्तर पर संघर्ष कर रहे सुलेमान हाशमी जब अपने भवंजाली प्रेम में रूबी को फँसा कर भावनात्मक खेलने लगता है तो “लव जिहाद” जैसा लगता है।
भारत में ड्रग्स कारोबार में महती भूमिका निभाने वाले नाइजीरिया मूल के लोगों को लेखिका ने सांकेतिक रूप से दिखाया है।पुलिसिया कार्रवाई और आरोपी को दोषी के रूप में देख गाली-गलौज और बर्बरता से पेश आना शायद पुलिस का स्वभाव बन चुका है,जिसे लेखिका ने नाइजीरियन द्वारा रूबी के पर्स में फ़रेब से डाले गये स्मैक को पकड़ने पर जो दुर्व्यवहार महिला पुलिसकर्मियों द्वारा किया जाता है दर्शाया है।
सीआईएसएफ़ के डीजीपी आसिफ़ सिद्दीक़ी से ज़ोरदार बहस और सटीक दलीलों द्वारा संतुष्ट करना परंपरागत स्त्री स्वरूप को तोड़ता हुआ विद्रोहात्मक तेवर दिखाता है,जो सम्प्रति समाज की महती ज़रूरत है।आसिफ़ का रूबी पर लट्टू होना और तन्मयता से चाहने के उद्धरण के रूप में सुलेमान की भर हीक पिटाई तो है ही।उसके बाद भी रूबी का अपने दूर के रिश्तेदार द्वारा मुम्बई बुलाया जाना और संपत्ति हड़पने के मानसिकता से समाज में बिना अभिभावक के स्त्री को कैसे दमित किया जाता है…तन-मन-धन से इसे इस उपन्यास की लेखिका बयां कर रहीं हैं।
लेखिका की भाषा शैली बताती है की वे कई भाषाओं की जानकार हैं,संगीत की अच्छी श्रोता के साथ-साथ जानकार भी लगती हैं।उपन्यास में वाक्यालंकार का ख़ूब प्रयोग है,उर्दू,मराठी,अवधी-भोजपुरी मिश्रित और अंग्रेज़ी का प्रयोग सुधी पाठकों के लिये रोचक और लुभावना है।चैप्टर के नाम आकर्षक तो हैं ही पात्र भी जीवंत हैं और पूरी घटनाक्रम ज़मीनी लगता है।मुम्बई के गली-मोहल्लों की बारीकी से पेश करना लेखिका के घुमक्कड़ी स्वभाव को दर्शाता है।

इन्हें और पढ़े जाने की ज़रूरत है इनकी विवादित कृति “माणिक कौल” है जिसे लोग उत्तरप्रदेश के एक विवादित कुलपति पर केंद्रित मानते है।इनकी प्रमुख रचना आसमानी चादर,किराये का मकान,बोहनी,ख़ाली तमंचा,माणिक कौल प्रभृति है।

सूफी राघवेंद्र