Public transport continues: भारत बंद के बावजूद दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन चालू

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Public transport continues: कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सोमवार को भारत बंद का एलान किया है. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शांतिपूर्ण बंद की बात कही है और सभी लोगों से इस बंद का समर्थन करने का भी आग्रह किया है.

40 संगठनों ने बुलाया बंद

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में 40 किसान संगठनों की ओर से सोमवार को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक भारत बंद का आह्वान किया गया है. एसकेएम ने कहा, पिछले वर्ष 27 सितंबर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 3 किसान विरोधी काले कानूनों को सहमति दी थी और लागू किया था.

हालांकि किसानों के मुताबिक इस दौरान सभी जरूरी सेवाएं पूर्ण रूप से चालू रहेंगी.

कई दलों ने दिया समर्थन

इसी बीच किसानों के इस समर्थन में तमाम राजनीतिक पार्टियों ने भी अपना समर्थन दिया है. इनमें माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक, समाजवादी पार्टी, भाकपा माले (लिबरेशन), भाकपा माले न्यू डेमोक्रेसी, एसयूसीआई (सी), एमसीपीआई (यू), भारतीय क्रान्तिकारी मार्क्‍सवादी पार्टी, के अलावा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आप, सपा, तेदेपा, जनता दल सेक्युलर, बसपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, द्रमुक, वाईएसआरसीपी, झामुमो, राजद, स्वराज इंडिया पार्टी शामिल है.

एसकेएम के अनुसार, भारत बंद में श्रमिक संघों, ट्रेड यूनियनों, कर्मचारियों और छात्र संघों, महिला संगठनों और ट्रांसपोर्टरों के संघों को शामिल किया गया है. बंद के मद्देनजर दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दिल्ली पुलिस के जवान सुबह से ही भारी संख्या में दिल्ली के विभिन्न जगहों पर नजर आए.

Public transport continues: मेट्रो स्टेशनों पर बढ़ी सुरक्षा

वहीं, किसानों के भारत बंद के बावजूद दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों और दिल्ली मेट्रो सहित सार्वजनिक परिवहन सोमवार को सुचारू रूप से चालू रहे. राजधानी में मेट्रो ट्रेनों और बसों के अलावा, ऑटो रिक्शा और सार्वजनिक और निजी परिवहन के अन्य साधन भी सामान्य रूप से आवाजाही करते दिखे.

गाजियाबाद में किसान यूनियन के बंद के एलान को देखते हुए पुलिस ने पेरिफेरल, हापुड़ चुंगी, यूपी गेट, गाजीपुर बॉर्डर सहित कई मुख्य मार्गों और चौराहों पर रूट डायवर्ट करने का आदेश दिया है.

दरअसल दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन के 10 महीने हो गए हैं. किसान भारत बंद करने से आंदोलन को और मजबूती मिलेगी ऐसी उम्मीद कर रहें हैं. सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन 26 जनवरी को हुई लाल किले पर हिसंक घटना के बनफ यह बातचीत रुक गई.

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