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प्रधानमंत्री मोदी बांग्लादेश में शक्ति पीठ में की पूजा अर्चना, जानें इस मंदिर से जुडी अहम बातें

प्रधानमंत्री मोदी कोरोना पेंडमिक के बाद पहली विदेश यात्रा पर कल यानि शुक्रवार को बांग्लादेश पहुँचे. PM मोदी बांग्लादेश के 50वीं स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गए है. नरेंद्र मोदी कल कार्यक्रम में शरीक हुए जिसमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल थी.
आज प्रधानमंत्री मोदी 51 शक्ति पीठों में प्रमुख यशोर काली मंदिर में पूजा अर्चना  किये. यह मंदिर बांग्लादेश के खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर स्थान पर स्थित है. ऐसी मान्यता है कि माता सती का बायां हाथ इसी जगह पर गिरा था.

क्या है शक्तिपीठ का महत्व?

पौराणिक एवं शास्त्रीय मान्यता के अनुसार एक बार माता सती के पिता प्रजापति दक्ष यज्ञ का आयोजन किये. उन्होंने सभी देवताओं को निमंत्रण दिया लेकिन भगवान शिव को नहीं आमंत्रित किये. माता सती यज्ञ में बिन बुलाये ही पिता के घर आ गयी लेकिन ज़ब उन्होंने देखा कि सभी देवताओं को स्थान दिया गया है लेकिन महादेव का वहाँ कोई स्थान नहीं है. इस अपमान से दुखी होकर माता सती उसी यज्ञकुण्ड में खुद को भस्म कर लिया. यह सूचना ज़ब महादेव को मिली तो वे वहाँ पहुँचे और माता सती का शव कंधे पर रखकर पागलों की तरह घूमने लगे. तब श्री हरी विष्णु माता सती का अंग काटकर महादेव के कंधों से हटाए. ऐ अंग जिस जिस स्थान पर गिरा उसे शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है. हिन्दू धर्म में इन शक्ति पीठों का विशेष महत्व है.

बांग्लादेश के खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर ( जैसोर ) स्थान पर माता का बायां हाथ गिरा था . इसकी शक्ति है यशोरेश्वरी और भैरव को चण्ड, शिव को चंद्र के नाम से जाना जाता है. आपको बता दें कि यह बांग्लादेश का तीसरा सबसे प्रमुख शक्तिपीठ है. इस मंदिर को पहले अनारी नाम से जाना जाता था जिसके लगभग 100 दरवाजे थे. मंदिर के पास में ही पहले एक बड़ा आयताकार एक भव्य मंच स्थापित था. यह मंच ऊपर से ढका हुआ था. इसे नट मंदिर कहा जाता था. यहां पर खड़े होकर माता के दर्शन किए जा सकते थे.