श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर PM Modi ने दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली: 6 जुलाई 1901 में कलकत्ता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी बैरिस्टर और शिक्षाविद थे। उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग और आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया। हालांकि, नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद से उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की 1980 में यही भारतीय जनता पार्टी बन गई।

पीएम मोदी ने जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि मुखर्जी के विचार आज भी लोगों को ताकत देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया,  ‘मैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। उनके ऊंचे आदर्श लाखों लोगों को आज भी प्रेरित करते रहते हैं। डॉक्टर मुखर्जी ने भारत की एकत और प्रगति के लिए अपना जीवन खपा दिया। उन्होंने एक असाधारण विद्वान के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार चिरकाल तक प्रासंगिक रहेंगे।शाह ने ट्वीट कर कहा, ‘‘डॉ. मुखर्जी ने अपनी दूरदर्शी सोच से देश में शिक्षा, स्वास्थ्य व औद्योगिक विकास की मजबूत नींव रखने और सामरिक दृष्टि से भारत को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया। उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार चिरकाल तक प्रासंगिक रहेंगे। ऐसे अप्रतिम राष्ट्रनायक की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।’’

भारतीय जनता पार्टी के नेता देश भर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जनसंघ के इस संस्थापक ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपने पूरे जीवन को न्यौछावर कर दिया। वहीं दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता एवं भाजपा के अन्य नेताओं ने शहीदी पार्क जाकर मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी और उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण किया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जा के खिलाफ थे और उन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताते हुए अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध किया था। संसद के भीतर और बाहर इसके खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ी। भारतीय जनसंघ का मकसद इसे तत्काल समाप्त करना था। मुखर्जी ने 26 जून 1952 को अपने लोकसभा भाषण में इस प्रावधान के खिलाफ आवाज उठाई। राज्य का अलग झंडा होने और प्रधानमंत्री के प्रवाधान पर मुखर्जी ने कहा था ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।’ मोदी सरकार ने 2019 में इसको समाप्त कर दिया।  मुखर्जी 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। 1953 में जम्मू और कश्मीर पुलिस की हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई।

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