'एकल' की पहल पर गांवों के लोगों ने लगाया लॉकडाउन।
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नई दिल्ली। झारखंड, उड़ीसा, तेलंगाना, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के वनांचलों में वनवासी परिवार जिन्होंने शायद ही कोरोना महामारी का नाम सुना था, वहां भी कोरोना महामारी तेजी से फैलती जा रही है। शासन प्रशासन के सुस्त रवैए को देखते हुए इन राज्यों के वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रमीणों ने अब अपनी सुरक्षा का जिम्मा खुद संभाल लिया है।


विश्व हिंदू परिषद का अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनुषांगिक संगठन 'एकल' की पहल पर गांवों के लोगों ने पूरी तरह से लॉकडाउन कर रखा है। गांव के अंदर कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश न करने पाए इसके लिए ग्रामीणों ने गांव के अंदर जाने वाले रास्तों को नाके, बैरिकेड्स, बल्लियां लगाकर बंद कर दिया है एवं चारों ओर गांव के दर्जनों युवा निगरानी रख रहे हैं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश भी करता है, तो उसकी जांच की जाती है। इसके बाद ही उसे प्रवेश दिया जाता है।
ग्रामवासियों को कोविड 19 के कहर से बचाने और कोरोना प्रोटोकॉल सिखाने के लिए एकल संगठन आगे आया है। एकल सुदूर इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को मास्क का उपयोग, दो गज दूरी, साबुन से हाथ धोना, बीमार होने पर आइसोलेट होना जैसे जरूरी कदम उठाने जैसे कामों से उन्हें अवगत करवा रहा है। एकल आरोग्य फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने महामारी से पीड़ित वनवासी परिवारों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जिस पर 20 मई, 2021 तक 1,376 कॉल्स आईं जिनका निराकरण किया गया है।

एकल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष राजेश गोयल ने अमर उजाला को बताया कि एकल के कुल पांच महिला सशक्तिकरण केन्द्रों पर मास्क निर्माण का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है। अभी तक कुल 42,300 मास्क निर्मित हो चुके हैं जिनमें से 25,500 मास्क का गांवों में वितरण किया जा चुका है। दिल्ली समिति के माध्यम से ताइवान के प्राप्त एक लाख मास्क का वितरण 21 मई, 2021 से आरम्भ हो चुका है। गांव के सैनिटाइजेशन के लिए शुरुआत में एकल के पांच हजार गांवों में दवा कीट का वितरण किया जा चुका है। इसकी संख्या बढाई जा रही है।

गोयल ने आगे कहा, एकल गांवों को डायग्नोस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध करवा रहा है। इसके अंतर्गत एकल विद्यालय फाउंडेशन ऑफ अमेरिका के सहयोग से कुल पांच हजार गांवों में वितरण हेतु एक-एक यूनिट ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर उपलब्ध करवाया गया है। एकल आरोग्य योजना के माध्यम से आरोग्य संसाधन केंद्र के कुल 1,230 ग्रामों में ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर वितरित किये जा चुके हैं। केंद्र के आयुष विभाग की साझेदारी में एकल आरोग्य योजना द्वारा 21 मई से 21 जून, 2021 (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) तक एक माह प्रतिदिन एक घंटे वर्चुअल योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिन गांवों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है वहां इसकी रिकॉर्डिंग को दिखाकर ग्रामवासियों को योग के प्रति जागरूक किया जाता है।

इसके अलावा सुदूर अंचल में कार्यकर्ताओं के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 897 मरीजों का निरीक्षण किया गया है। जहां इंटरनेट की सुविधा नहीं है वहां कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर भेजा गया और उन्होंने ग्रामीणों को निरीक्षण किया। कुल 1,63,141 गांवों में दीवारों पर हेल्पलाइन नंबर व कोरोना से बचाव तथा उसके प्रारंभिक उपचार को लिखकर ग्रामवासियों को जागृत किया जा रहा है।

वनबन्धु परिषद के मीडिया सेल को-ऑर्डिनेटर सिद्धार्थ शंकर गौतम ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना महामारी के चलते प्रत्येक गांव के एकल शिक्षक के माध्यम से ग्रामवासियों को मास्क, सैनिटाइजर/साबुन व दो गज दूरी के नियम का पालन करवाया जा रहा है। एकल की पहल से ग्रामवासियों ने स्वयं ही पूरे गांव को सील कर दिया है। यदि कोई बाहरी व्यक्ति गांव में प्रवेश करता है तो उसकी जांच की जाती है। बहुत आवश्यक होने पर ही उसे गांव में प्रवेश करने दिया जाता है। यदि आवश्यक हुआ तो उक्त बाहरी व्यक्ति को 15 दिन के लिए आइसोलेट भी किया जा रहा है। यदि किसी ग्रामवासी को कोरोना के प्रारंभिक लक्षण दिखते हैं या उसकी तबियत बिगडती है तो तत्काल स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर उसे चिकित्सीय उपचार दिलवाया जाता है।

गौतम ने कहा, एकल ग्राम प्रमुख आस-पास के बड़े कस्बों के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से संपर्क स्थापित कर किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहते हैं। इसके अलावा आरोग्य विभाग की सेविकाओं द्वारा गांव-गांव में आयुष काढ़े का घर-घर प्रचार करने के साथ ही उसके वितरण की व्यवस्था भी की जा रही है। सेविकाओं द्वारा ग्रामीणों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकास हेतु योग व प्राणायाम एवं पंचामृत के प्रयोग पर बल दिया जा रहा है। एकल ग्रामोत्थान विभाग द्वारा कोरोना सुरक्षा कवच के बैनर द्वारा जागरूकता का कार्य किया जा रहा है।

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